गर्भावस्था के दौरान किन फलों में सावधानी जरूरी है

Summary

गर्भावस्था के दौरान खान-पान को लेकर महिलाओं के मन में कई तरह के सवाल होते हैं, खासकर यह कि प्रेग्नेंसी में कौन से फल नहीं खाने चाहिए (fruits to avoid during pregnancy)। पपीता, अनानास और अंगूर जैसे फलों को लेकर अक्सर अलग-अलग बातें सुनने को मिलती हैं, लेकिन हर फल को गर्भावस्था में असुरक्षित मानना सही नहीं है। अधिकांश फल संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें अच्छी तरह धोकर और उचित मात्रा में खाना जरूरी है। खासकर कच्चे या अधपके पपीते को लेकर सावधानी बरतना और किसी भी फल को लेकर भ्रम होने पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है। गर्भावस्था के दौरान महिला की स्वास्थ्य स्थिति, गर्भावस्था का चरण और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार आहार में कुछ बदलाव भी जरूरी हो सकते हैं। गुड़गाँव के मिरेकल्स हेल्थकेयर में 50+ अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट की टीम गर्भवती महिलाओं को उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार सही मार्गदर्शन प्रदान करती है। विशेषज्ञों की मदद से होने वाली माँ अपनी गर्भावस्था के दौरान पोषण, प्रीनेटल केयर (prenatal care) और रोज़मर्रा की खान-पान संबंधी आदतों को बेहतर तरीके से समझ सकती है। इससे फलों और अन्य खाद्य पदार्थों को लेकर अनावश्यक भ्रम से बचने के साथ-साथ माँ और शिशु के स्वास्थ्य के लिए सही विकल्प चुनना आसान हो जाता है।

प्रेग्नेंसी में कौन से फल नहीं खाने चाहिए (fruits to avoid in pregnancy)? यह सवाल गर्भावस्था के दौरान लगभग हर होने वाली माँ के मन में आता है। परिवार और इंटरनेट पर अक्सर पपीता, अनानास, अंगूर या दूसरे फलों को लेकर कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। लेकिन हर लोकप्रिय सलाह वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होती। वास्तव में, गर्भावस्था के दौरान अधिकांश फल सुरक्षित और पौष्टिक होते हैं, बशर्ते उन्हें अच्छी तरह धोकर और उचित मात्रा में खाया जाए। मिरेकल्स हेल्थकेयर, गुड़गांव की अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट और ऑब्स्टेट्रिशियन (gynaecologist and obstetrician in Gurgaon) डॉ. शीला गौर के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान फल संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उन्हें चुनते समय महिला की स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था की अवस्था को ध्यान में रखना जरूरी है।

इसलिए “प्रेग्नेंसी में फलों से बचें” कहना सही नहीं है। बल्कि यह समझना जरूरी है कि कौन से फल या फल से बने खाद्य पदार्थ किन परिस्थितियों में सावधानी की मांग करते हैं। खासकर गुरुग्राम जैसी तेज रफ्तार शहरी जिंदगी में, जहां महिलाएं घर के साथ ऑफिस और अन्य जिम्मेदारियां भी संभालती हैं, सही pregnancy diet को लेकर स्पष्ट जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।

प्रेग्नेंसी में फल खाना क्यों जरूरी है? Why is it important to eat fruit during pregnancy?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि गर्भावस्था के दौरान फलों को डाइट में शामिल करना क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है। फल संतुलित आहार का एक अहम हिस्सा हैं और इनमें फाइबर, विटामिन, मिनरल्स, पानी और प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, संतरा, मौसमी और अन्य खट्टे फल विटामिन C के अच्छे स्रोत हैं, जबकि केला विटामिन B6 और अन्य पोषक तत्व प्रदान करता है।

फलों में मौजूद फाइबर गर्भावस्था के दौरान होने वाली कब्ज जैसी आम समस्या से राहत पाने में भी मदद कर सकता है। हालांकि, हर महिला की पोषण संबंधी जरूरतें अलग होती हैं। इसलिए फलों की मात्रा तय करते समय आपकी स्वास्थ्य स्थिति, वजन, ब्लड शुगर और गर्भावस्था से जुड़ी किसी अन्य समस्या को ध्यान में रखना जरूरी है।

प्रेग्नेंसी के दौरान कौन से फल नहीं खाने चाहिए? Foods not to eat during pregnancy

डॉ. शीला गौर के अनुसार, गर्भावस्था में फलों को लेकर किसी एक तय सूची को सभी महिलाओं पर लागू नहीं किया जा सकता। प्रेग्नेंसी में कौन से फल नहीं खाने चाहिए (fruits to avoid during pregnancy) जैसे सवालों में अक्सर पपीता, अनानास और अंगूर का जिक्र होता है, लेकिन हर गर्भवती महिला के लिए इन फलों को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं होता। फल चुनते समय उनकी मात्रा, पकने की अवस्था, स्वच्छता और महिला की व्यक्तिगत स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

कुछ फलों या उन्हें खाने के तरीके में विशेष सावधानी की आवश्यकता हो सकती है, खासकर यदि गर्भावस्था से जुड़ी कोई स्वास्थ्य समस्या मौजूद हो। इसलिए किसी फल को अपनी pregnancy diet से हटाने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी स्थिति में क्या सुरक्षित और उपयुक्त है।

1. कच्चा या अधपका पपीता

कच्चे पपीते को लेकर गर्भावस्था ((papaya and pregnancy) में लंबे समय से सावधानी बरतने की सलाह दी जाती रही है। इसमें लेटेक्स की मात्रा अधिक हो सकती है और इसी वजह से कच्चे या अधपके पपीते से बचना बेहतर माना जाता है।

हालांकि, पक्के हुए पपीते और कच्चे पपीते को एक ही तरह से देखना उचित नहीं है। अगर आप पपीता खाना चाहती हैं, तो अपने गायनेकोलॉजिस्ट से अपनी pregnancy की स्थिति के अनुसार सलाह लें, खासकर यदि आपको bleeding, uterine problems या pregnancy-related complications हैं।

2. बिना धोए हुए फल

गर्भावस्था में फल खाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि उन्हें साफ और सुरक्षित तरीके से तैयार करके खाया जाए। कच्चे फलों और सब्जियों की सतह पर बैक्टीरिया या अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। NIH की रिसर्च के अनुसार, फलों और सब्जियों पर मौजूद कीटाणुओं का जोखिम कम करने के लिए उन्हें अच्छी तरह धोना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान लिस्टेरिया जैसी खाद्य जनित संक्रमणों से बचाव के लिए भी कच्चे फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोने की सलाह दी जाती है।

इसलिए सेब, अमरूद, अंगूर, स्ट्रॉबेरी, संतरा या कोई भी अन्य फल खाने से पहले उन्हें बहते साफ पानी में अच्छी तरह धोएं। एक अध्ययन में भी बहते पानी के नीचे फल-सब्जियों को रगड़कर धोने से उनकी सतह पर मौजूद बैक्टीरियल contamination में कमी देखी गई।

ध्यान रखें: फल धोने के लिए साबुन या घरेलू डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें; साफ बहते पानी से अच्छी तरह धोना पर्याप्त है।

3. पहले से कटे और लंबे समय तक बाहर रखे फल

डॉ. शीला कहती हैं कि गर्भावस्था के दौरान फल कितने पौष्टिक हैं, इसके साथ-साथ उनकी साफ-सफाई और उन्हें सही तरीके से रखने पर भी ध्यान देना जरूरी है। पहले से कटे हुए फल अगर लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखे रहें या साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए, तो उनमें हानिकारक बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए सड़क किनारे या ऐसी जगहों से कटे हुए फल और फ्रूट चाट लेने से बचना बेहतर है, जहां साफ-सफाई और उन्हें रखने की व्यवस्था को लेकर भरोसा न हो। घर पर फल काटते समय साफ हाथों और बर्तनों का इस्तेमाल करें और कटे हुए फलों को लंबे समय तक बाहर रखने के बजाय जल्द खाएं या फ्रिज में सुरक्षित तरीके से रखें।

4. अनपाश्चराइज्ड फलों का जूस

गर्भावस्था के दौरान फल खाना (fruits to eat in pregnancy) और बाहर मिलने वाला ताजा जूस पीना एक जैसा नहीं है। बाहर तैयार किए गए फलों के जूस में साफ-सफाई, पानी की गुणवत्ता और फल की स्वच्छता को लेकर अनिश्चितता हो सकती है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए गर्भावस्था में ऐसे जूस से बचना बेहतर है जिसकी तैयारी और स्वच्छता को लेकर आपको पूरा भरोसा न हो।

अगर जूस पीना चाहें, तो घर पर अच्छी तरह धोए हुए फलों और साफ पानी से तैयार किया गया जूस बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि, जहां संभव हो, जूस की जगह साबुत फल खाना अधिक फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि साबुत फल में फाइबर मौजूद रहता है और यह संतुलित आहार का बेहतर हिस्सा बन सकता है।

प्रेग्नेंसी के हर ट्राइमेस्टर में क्या खाना चाहिए और किन पोषक तत्वों पर ध्यान देना चाहिए, इसकी पूरी जानकारी के लिए हमारा Trimester Wise Indian Pregnancy Diet Plan for Women ब्लॉग पढ़ें।

क्या प्रेग्नेंसी में पपीता खाना बंद कर देना चाहिए? Should you stop eating papaya during pregnancy?

पपीते को लेकर गर्भावस्था में सबसे ज्यादा भ्रांतियां देखने को मिलती हैं। कई लोगों का मानना है कि पपीता खाने से गर्भपात हो सकता है, जिसके कारण महिलाएं इसे पूरी तरह अपनी डाइट से हटा देती हैं। हालांकि, पपीते की किस्म और उसकी पकने की अवस्था को समझना जरूरी है। कच्चे और अधपके पपीते में लेटेक्स की मात्रा अधिक हो सकती है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान इनके सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

दूसरी ओर, पके हुए पपीते को लेकर सभी गर्भवती महिलाओं के लिए (papaya for pregnant ladies) एक जैसा प्रतिबंध जरूरी नहीं माना जाता है। इसका सेवन करना है या नहीं, यह महिला की गर्भावस्था की स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए पपीते को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है, ताकि आपको आपकी स्थिति के अनुसार सही सलाह मिल सके।

क्या प्रेग्नेंसी में अनानास खाना सुरक्षित है? Is it safe to eat pineapple during pregnancy?

अनानास को लेकर गर्भावस्था में अक्सर यह धारणा सुनने को मिलती है कि इसे खाने से गर्भपात या समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, सामान्य मात्रा में अनानास के सेवन को सभी गर्भवती महिलाओं के लिए प्रतिबंधित करने का पर्याप्त वैज्ञानिक आधार नहीं है। तीसरी तिमाही के दौरान अनानास के सेवन और प्रसव से जुड़े कुछ सकारात्मक परिणामों के बीच संबंध देखा गया। NIH के एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था में अनानास (pineapple during pregnancy) का सेवन करने वाली महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के परिपक्व होने में सुधार, प्रसव की अवधि लगभग 1.7 घंटे कम और सामान्य प्रसव की संभावना 1.8 गुना अधिक देखी गई। हालांकि, यह एक अवलोकनात्मक अध्ययन था, इसलिए इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अनानास सीधे तौर पर इन परिणामों का कारण है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि गर्भावस्था में अनानास (pineapple while pregnant) का अधिक सेवन किया जाए या इसे प्रसव शुरू करने के घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाए? अनानास को संतुलित मात्रा में लेना और अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। यदि आपको एसिडिटी, पेट की संवेदनशीलता, गर्भावधि मधुमेह (gestational diabetes) या गर्भावस्था से जुड़ी कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो अपनी डाइट में अनानास को शामिल करने से पहले डॉक्टर से उचित सलाह लेना बेहतर है।

क्या प्रेग्नेंसी में अंगूर नहीं खाने चाहिए? Should grapes be avoided during pregnancy?

अंगूर को लेकर गर्भावस्था (grapes for pregnancy)  में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इन्हें खाने से माँ या बच्चे को कोई नुकसान हो सकता है। सामान्य मात्रा में अंगूर को गर्भावस्था के दौरान पूरी तरह प्रतिबंधित फल नहीं माना जाता। इनमें पानी, फाइबर और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, अंगूर को अच्छी तरह धोकर खाना जरूरी है। यदि किसी महिला को गर्भावधि मधुमेह या ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या है, तो अंगूर की मात्रा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत हो सकती है।

डॉ. गौर कहती हैं, “हमारी ओपीडी में अंगूर को लेकर कई गर्भवती महिलाएं सवाल करती हैं कि इसे खाना सुरक्षित है या नहीं और कितनी मात्रा में खाना चाहिए। अंगूर को लेकर किसी एक धारणा के आधार पर फैसला लेने के बजाय महिला की पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखना जरूरी है। खासकर ब्लड शुगर की समस्या होने पर इसकी मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार रखना बेहतर होता है।”

प्रेग्नेंसी में कौन से फल खा सकते हैं? Which Fruits to Eat During Pregnancy?

अब तक हमने उन फलों और परिस्थितियों के बारे में जाना जिनमें गर्भावस्था के दौरान थोड़ी सावधानी जरूरी हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रेग्नेंसी में फलों की लंबी सूची से बचना चाहिए। अधिकांश ताजे और अच्छी तरह से साफ किए गए फल संतुलित गर्भावस्था आहार का हिस्सा हो सकते हैं। फल चुनते समय उनकी ताजगी, साफ-सफाई और मात्रा का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।

गर्भावस्था के दौरान अपनी डाइट में अलग-अलग तरह के फल शामिल किए जा सकते हैं, जैसे:

  • सेब: फाइबर और अन्य पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत

  • केला: ऊर्जा और पोटैशियम प्रदान करता है

  • संतरा और मौसमी: विटामिन C से भरपूर

  • अमरूद: फाइबर और विटामिन C का अच्छा स्रोत

  • नाशपाती: फायबरयुक्त फळ

  • अनार: कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर

  • कीवी: विटामिन C और फाइबर का स्रोत

  • आम: उचित मात्रा में लिया जा सकता है

  • पका हुआ पपीता: अपनी pregnancy की स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह से

  • जामुन: फाइबर और अन्य पोषक तत्वों का स्रोत

  • स्ट्रॉबेरी और अन्य बेरीज: विभिन्न विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करती हैं

  • तरबूज और खरबूजा: पानी की अच्छी मात्रा प्रदान करते हैं

फलों को खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना और कटे हुए फलों को साफ तरीके से रखना जरूरी है। जहां संभव हो, साबुत फल को जूस की तुलना में प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसमें फाइबर भी मिलता है। हालांकि, यदि आपको गर्भावधि मधुमेह या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो फलों की मात्रा और प्रकार अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह से तय करें।

गर्भावस्था में फलों को लेकर मिथक नहीं, सही जानकारी जरूरी है

गर्भावस्था के दौरान फलों (fruits during pregnancy) को लेकर कई तरह की धारणाएं और गलतफहमियां हो सकती हैं,  लेकिन हर फल को अपनी डाइट से हटाना जरूरी नहीं है। अधिकतर फल संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें अच्छी तरह धोकर, सही तरीके से तैयार करके और उचित मात्रा में खाया जाए। कच्चे या अधपके पपीते, लंबे समय तक बाहर रखे कटे फलों और अस्वच्छ तरीके से तैयार किए गए फलों के सेवन में विशेष सावधानी रखना जरूरी है। वहीं, यदि आपको गर्भावधि मधुमेह या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो फलों की मात्रा और चुनाव आपकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार होना चाहिए।

अगर आपको प्रेग्नेंसी में कौन से फल खाने चाहिए या किन फलों से सावधानी बरतनी (fruits to avoid during pregnancy) चाहिए, इसे लेकर कोई भ्रम है, तो इंटरनेट की सामान्य जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार मिरेकल्स हेल्थकेयर में अपने आस-पास के किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ (gynaecologist near you) से सलाह लें।

प्रेग्नेंसी डाइट और पोषण की देखभाल, मिरेकल्स हेल्थकेयर के साथ

गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए और किन खाद्य पदार्थों से सावधानी रखनी चाहिए, यह हर होने वाली माँ के लिए महत्वपूर्ण सवाल है। सही जानकारी के साथ नियमित प्रेग्नेंसी चेक-अप और अनुभवी विशेषज्ञ की निगरानी माँ और शिशु दोनों के लिए बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने में मदद करती है।

  • वर्ष 2002 से गुरुग्राम के अग्रणी मातृत्व हॉस्पिटल (maternity hospital in Gurgaon), मिरेकल्स हेल्थकेयर में हम मानते हैं कि हर प्रेग्नेंसी अलग होती है। आपकी मेडिकल हिस्ट्री, गर्भावस्था की अवस्था, ब्लड शुगर, वजन और पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 50+ अनुभवी महिला गायनेकोलॉजिस्ट और ऑब्स्टेट्रिशियन प्रेग्नेंसी डाइट और प्रीनेटल केयर के लिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

  • प्रेग्नेंसी में डाइट से जुड़े सवालों के लिए आपको अलग-अलग जगहों से सलाह लेने की जरूरत नहीं पड़ती। पपीता, अनानास, अंगूर या किसी अन्य फल को लेकर कोई भ्रम हो, तो हमारे विशेषज्ञ आपकी गर्भावस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बताते हैं कि क्या खाना उचित है और किन चीजों में सावधानी बरतनी चाहिए।

  • 25,000+ सफल डिलीवरी के अनुभव के साथ मिरेकल्स हेल्थकेयर में हमारा उद्देश्य केवल सुरक्षित प्रसव तक सीमित नहीं है। गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर डिलीवरी और उसके बाद तक, हमारी विशेषज्ञ टीम माँ और शिशु की जरूरतों के अनुसार निरंतर और समग्र देखभाल प्रदान करती है।

  • अगर गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर, एनीमिया, ब्लड प्रेशर या कोई अन्य समस्या सामने आती है, तो पोषण संबंधी जरूरतें भी बदल सकती हैं। नियमित प्रेग्नेंसी चेक-अप और मल्टी-स्पेशियलिटी सपोर्ट के साथ ऐसी स्वास्थ्य स्थितियों की निगरानी कर आवश्यक देखभाल और विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराई जाती है।

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  • डिलीवरी के बाद भी माँ और शिशु की देखभाल जारी रहती है। पीडियाट्रिक केयर और इन-हाउस लैक्टेशन काउंसलर्स नई माताओं को स्तनपान की सही शुरुआत, पोजिशन और शुरुआती चुनौतियों के समाधान के लिए विशेषज्ञ सहायता प्रदान करते हैं।

  • गुरुग्राम के सेक्टर-14, सेक्टर-56 और सेक्टर-82 में मिरेकल्स हेल्थकेयर के सेंटर होने के कारण प्रेग्नेंसी चेक-अप, विशेषज्ञ परामर्श, डायग्नोस्टिक्स और मैटरनिटी केयर जैसी सेवाएँ आपके नज़दीक उपलब्ध हैं।

सही पोषण, नियमित प्रीनेटल केयर और अनुभवी विशेषज्ञों की निगरानी गर्भावस्था के सफर को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकती है। अपनी प्रेग्नेंसी डाइट या किसी फल को लेकर कोई भी सवाल हो, तो मिरेकल्स हेल्थकेयर, गुरुग्राम के अनुभवी गायनेकोलॉजी डॉक्टर से परामर्श लें।

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Frequently Asked Questions

आयोडीन युक्त नमक, दूध-दही, अंडे और डॉक्टर की सलाह के अनुसार संतुलित आहार लें। थायराइड की दवा या आयोडीन सप्लीमेंट की मात्रा में खुद से बदलाव न करें।

घर पर बना हल्का चटपटा खाना, जैसे भुना चना, मखाना, भेल या ताजे फलों की चाट ले सकती हैं। बहुत ज्यादा मिर्च, तेल और बाहर का अस्वच्छ खाना सीमित रखें।

डॉ. शीला के अनुसार किसी एक सब्जी को सबसे ज्यादा खाने के बजाय पालक, मेथी, ब्रोकोली, गाजर, लौकी और अन्य मौसमी सब्जियों को बदल-बदलकर डाइट में शामिल करें।

दो महीने की प्रेगनेंसी में सेब, केला, संतरा, अमरूद, अनार और अन्य ताजे फलों को अच्छी तरह धोकर उचित मात्रा में लिया जा सकता है। किसी खास स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर आपकी डाइट के अनुसार सलाह दे सकते हैं।

डॉ. शीला कहती हैं कि मरीज़ अक्सर पूछते हैं कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें किन सब्ज़ियों से परहेज़ (vegetables to avoid during pregnancy) करना चाहिए। गर्भावस्था में आमतौर पर किसी खास सब्जी को पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं होती, लेकिन कच्ची या अधपकी सब्जियों और बिना अच्छी तरह धोई गई सब्जियों से बचना चाहिए। बाहर का कच्चा सलाद या ऐसी सब्जियां जिनकी साफ-सफाई पर भरोसा न हो, उनसे भी सावधानी रखें।