सिफलिस: लक्षण, कारण, निदान, उपचार और रोकथाम

Summary

  • सिफलिस एक यौन संचारित संक्रमण (STI) है, जो Treponema pallidum बैक्टीरिया के कारण होता है।

  • संक्रमण की शुरुआत अक्सर दर्द रहित घावों से होती है। बाद में त्वचा पर चकत्ते, बुखार और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • सिफलिस के चार चरण प्राथमिक, द्वितीयक, गुप्त और तृतीयक होते हैं । बिना उपचार के यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकता है। पेनिसिलिन सहित उपयुक्त एंटीबायोटिक उपचार से सिफलिस का इलाज संभव है।

  • रक्त जाँच के माध्यम से संक्रमण की पहचान की जाती है।

  • गर्भावस्था के दौरान समय पर जाँच और उपचार माँ से बच्चे में संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक हैं।

  • सुरक्षित यौन संबंध, नियमित STI जाँच और संक्रमित साथी का उपचार संक्रमण की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • समय पर जाँच और उपचार सिफलिस से होने वाली गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद करते हैं।

  • सिफलिस के लक्षणों के मूल्यांकन और उचित उपचार के लिए मिरेकल्स हेल्थकेयर, गुरुग्राम में स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। अपॉइंटमेंट के लिए 906-906-8800 पर कॉल करें।

सिफलिस (Syphilis) एक यौन संचारित संक्रमण (STI) है, जो Treponema pallidum नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क के दौरान फैलता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं या दिखाई ही नहीं देते, इसलिए कई बार व्यक्ति को संक्रमण होने का पता नहीं चलता। समय पर पहचान और सही उपचार न मिलने पर सिफलिस शरीर के कई अंगों, जैसे मस्तिष्क, नसों, आँखों और हृदय को प्रभावित कर सकता है।

सिफलिस के शुरुआती चरणों में इलाज अधिक प्रभावी होता है। इसलिए इसके लक्षणों, कारणों, निदान, उपचार और रोकथाम के तरीकों को समझना जरूरी है। यदि आपको किसी संभावित संक्रमण का संदेह है या यौन संपर्क के बाद असामान्य घाव या चकत्ते दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श और आवश्यक जाँच करवाना महत्वपूर्ण है।

सिफलिस क्या है? What is Syphilis?

सिफलिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के घाव के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। ये घाव जननांगों, गुदा, होंठ या मुँह के आसपास हो सकते हैं। संक्रमण के लक्षण समय के साथ बदल सकते हैं और इनके आधार पर सिफलिस को अलग-अलग चरणों में बाँटा जाता है।

कभी-कभी शुरुआती घाव बिना दर्द के होते हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन घाव ठीक होने का अर्थ यह नहीं है कि संक्रमण समाप्त हो गया है। बिना उपचार के बैक्टीरिया शरीर में बना रह सकता है और आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकता है।

सिफलिस का समय पर निदान और उचित एंटीबायोटिक उपचार संक्रमण को नियंत्रित करने तथा जटिलताओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गुरुग्राम में मिरेकल्स हेल्थकेयर की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट (gynaecologist in gurgaon) डॉ. साधना शर्मा सलाह देती हैं कि सिफलिस के शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और संक्रमण का शक होने पर समय पर जांच और सही इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

सिफलिस के चरण कौन-कौन से हैं? Which are the Stages of Syphilis?

सिफलिस को इसके लक्षणों और संक्रमण की अवस्था के आधार पर मुख्य रूप से चार चरणों (syphilis stages) में बाँटा जाता है। प्रत्येक चरण में लक्षण अलग हो सकते हैं, और कुछ चरणों में व्यक्ति को कोई स्पष्ट परेशानी महसूस नहीं होती।

  • प्राथमिक सिफलिस (Primary Syphilis): यह संक्रमण का शुरुआती चरण है। इसमें संक्रमण के स्थान पर एक या अधिक दर्द रहित घाव दिखाई दे सकते हैं। ये घाव जननांगों, गुदा या मुँह के आसपास हो सकते हैं। घाव अपने आप ठीक हो सकते हैं, लेकिन बिना उपचार के संक्रमण शरीर में बना रह सकता है।

  • द्वितीयक सिफलिस (Secondary Syphilis): इस चरण में संक्रमण शरीर में फैलने लगता है। इसके लक्षणों में हथेलियों और पैरों के तलवों पर चकत्ते, बुखार, थकान, गले में खराश, लिम्फ नोड्स में सूजन और बालों का कुछ हिस्सों से झड़ना शामिल हो सकते हैं। लक्षण कम होने के बावजूद संक्रमण समाप्त होना जरूरी नहीं है।

  • गुप्त सिफलिस (Latent Syphilis): इस चरण में व्यक्ति को आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन संक्रमण शरीर में मौजूद रहता है। इसकी पहचान अक्सर रक्त जाँच से होती है। इसे संक्रमण की अवधि के आधार पर शुरुआती गुप्त सिफलिस और देर से होने वाले या अज्ञात अवधि के गुप्त सिफलिस में वर्गीकृत किया जा सकता है।

  • तृतीयक सिफलिस (Tertiary Syphilis): यह सिफलिस का देर से विकसित होने वाला गंभीर चरण है, जो कुछ अनुपचारित मामलों में वर्षों बाद सामने आ सकता है। इसमें हृदय, रक्त वाहिकाओं, मस्तिष्क, नसों और अन्य अंगों को नुकसान पहुँच सकता है।

महिलाओं में सिफलिस के लक्षण क्या हैं?  Syphilis Symptoms in Females

महिलाओं में सिफलिस के लक्षण संक्रमण के चरण के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। शुरुआती चरण में योनि, गुदा या मुँह के आसपास दर्द रहित घाव दिखाई दे सकते हैं। संक्रमण बढ़ने पर त्वचा पर चकत्ते, बुखार और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। हालांकि, कुछ महिलाओं में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते हैं।

महिलाओं में सिफलिस के निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • जननांगों के आसपास दर्द रहित घाव: योनि, योनि के बाहरी हिस्से, गुदा या मुँह के आसपास एक या अधिक घाव हो सकते हैं।

  • त्वचा पर चकत्ते: शरीर पर लाल या भूरे रंग के चकत्ते दिखाई दे सकते हैं, विशेषकर हथेलियों और पैरों के तलवों पर।

  • बुखार और थकान: बिना स्पष्ट कारण के बुखार, कमजोरी या थकान महसूस हो सकती है।

  • लिम्फ नोड्स में सूजन: गर्दन, बगल या जाँघ के आसपास की लसीका ग्रंथियों में सूजन हो सकती है।

  • गले में खराश और शरीर में दर्द: संक्रमण के दूसरे चरण में गले में परेशानी, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।

  • बालों का झड़ना: कुछ महिलाओं में सिर या शरीर के बाल जगह-जगह से झड़ सकते हैं।

  • दृष्टि या सुनने में बदलाव: गंभीर मामलों में आँखों, कानों या तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ सकता है, जिससे दृष्टि या सुनने की क्षमता में बदलाव हो सकता है।

महिलाओं में सिफलिस के शुरुआती घाव और त्वचा पर चकत्ते बिना उपचार के भी ठीक हो सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि संक्रमण समाप्त हो गया है। यदि आपको इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे या संक्रमित साथी के संपर्क में आने की आशंका हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर आवश्यक जाँच करवाएँ।

सिफलिस बीमारी किस कारण से होती है? Reasons for Syphilis Disease

सिफलिस का मुख्य कारण Treponema pallidum बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के साथ सीधे यौन संपर्क के दौरान फैलता है।

सिफलिस रोग निम्न कारणों (syphilis disease is caused by) से हो सकता है:

  • असुरक्षित यौन संपर्क: संक्रमित व्यक्ति के साथ योनि, गुदा या मुख मैथुन के दौरान सिफलिस फैल सकता है, विशेषकर जब संक्रमित घाव के सीधे संपर्क में आया जाए।

  • संक्रमित घावों के संपर्क में आना: जननांगों, मुँह या शरीर के अन्य प्रभावित हिस्सों पर मौजूद घावों के सीधे संपर्क से संक्रमण हो सकता है।

  • गर्भावस्था के दौरान संक्रमण: संक्रमित गर्भवती महिला से सिफलिस गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुँच सकता है। इसे जन्मजात सिफलिस (congenital syphilis) कहा जाता है।

डॉ. साधना के अनुसार, सिफलिस के संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना, जोखिम होने पर समय पर STI जाँच करवाना और संक्रमण की पुष्टि होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेना महत्वपूर्ण है।

सिफलिस आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के साथ सामान्य सामाजिक संपर्क, जैसे हाथ मिलाने, गले मिलने, एक साथ खाना खाने या टॉयलेट सीट साझा करने से नहीं फैलता।

सिफलिस का निदान कैसे किया जाता है?  How is syphilis diagnosed?

सिफलिस का निदान डॉक्टर द्वारा लक्षणों, यौन स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी और आवश्यक चिकित्सकीय जाँच के आधार पर किया जाता है। केवल लक्षण देखकर संक्रमण की पुष्टि करना हमेशा संभव नहीं होता, क्योंकि इसके लक्षण दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं।

सिफलिस के निदान के लिए निम्नलिखित जाँच (syphilis test) की जा सकती हैं:

1. रक्त जाँच

सिफलिस की पहचान के लिए रक्त जाँच सबसे सामान्य तरीकों में से एक है। इसमें संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया से संबंधित एंटीबॉडी की जाँच की जाती है।

डॉक्टर आवश्यकतानुसार दो प्रकार की जाँचों का उपयोग कर सकते हैं:

  • नॉन-ट्रेपोनेमल टेस्ट: VDRL और RPR जैसी जाँचों का उपयोग संक्रमण का मूल्यांकन करने तथा उपचार के बाद प्रतिक्रिया पर नजर रखने के लिए किया जाता है।

  • ट्रेपोनेमल टेस्ट: ये जाँच सिफलिस के बैक्टीरिया के विरुद्ध बनने वाली विशिष्ट एंटीबॉडी का पता लगाने में मदद करती हैं।

कभी-कभी संक्रमण के शुरुआती चरण में रक्त जाँच का परिणाम नकारात्मक आ सकता है। यदि संक्रमण का संदेह बना रहता है, तो डॉक्टर दोबारा जाँच कराने की सलाह दे सकते हैं।

2. घाव की जाँच

यदि शरीर पर सिफलिस से संबंधित घाव मौजूद हैं, तो कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर घाव से लिए गए नमूने की विशेष जाँच कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे संक्रमण की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है।

3. अन्य आवश्यक जाँच

यदि डॉक्टर को मस्तिष्क, नसों या आँखों से संबंधित जटिलताओं का संदेह हो, तो अतिरिक्त जाँच की आवश्यकता पड़ सकती है। सिफलिस का निदान होने पर अन्य यौन संचारित संक्रमणों, जैसे HIV, की जाँच की सलाह भी दी जा सकती है।

डॉ. शर्मा सलाह देती हैं कि सिफलिस की पुष्टि होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार अतिरिक्त जाँच करवाएँ, ताकि संबंधित जटिलताओं और अन्य यौन संचारित संक्रमणों की समय पर पहचान की जा सके।

महिलाओं में सिफलिस का उपचार कैसे किया जाता है? How is syphilis treated in Females?

महिलाओं में सिफलिस (syphilis treatment in females) का उपचार मुख्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। उपचार का सही तरीका संक्रमण के चरण, महिला की स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करता है। समय पर उपचार से संक्रमण को ठीक करने और गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

  • पेनिसिलिन से उपचार: बेंज़ाथिन पेनिसिलिन G (Benzathine Penicillin G) सिफलिस के उपचार में प्रमुख दवा है। इसकी खुराक और उपचार की अवधि संक्रमण के चरण के अनुसार निर्धारित की जाती है।

  • गर्भावस्था में उपचार: गर्भवती महिलाओं में पेनिसिलिन उपचार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे बच्चे तक संक्रमण पहुँचने का जोखिम कम किया जा सकता है।

  • अन्य जटिलताओं का उपचार: यदि संक्रमण मस्तिष्क, नसों या आँखों को प्रभावित करता है, तो अलग उपचार योजना और नस के माध्यम से एंटीबायोटिक देने की आवश्यकता हो सकती है।

  • यौन साथी की जाँच और उपचार: संक्रमण की पुष्टि होने पर यौन साथी को भी जाँच और आवश्यक उपचार करवाना चाहिए, ताकि दोबारा संक्रमण होने का जोखिम कम हो।

  • नियमित फॉलो-अप: उपचार के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार रक्त जाँच करवाना आवश्यक हो सकता है, जिससे उपचार के प्रति प्रतिक्रिया का आकलन किया जा सके।

डॉ. साधना शर्मा सलाह देती हैं कि सिफलिस के लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और संक्रमण की आशंका होने पर समय पर जाँच करवाकर डॉक्टर द्वारा निर्धारित उपचार पूरा करें। सिफलिस का समय पर उपचार संक्रमण को ठीक करने में मदद करता है, लेकिन पहले से हो चुके कुछ अंगों के नुकसान को पूरी तरह ठीक नहीं कर सकता।

गर्भावस्था में सिफलिस क्यों खतरनाक हो सकता है?

गर्भावस्था के दौरान सिफलिस का संक्रमण गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इससे गर्भपात, मृत शिशु का जन्म, समय से पहले प्रसव या जन्मजात सिफलिस का खतरा बढ़ सकता है।

जन्मजात सिफलिस से प्रभावित शिशुओं में जन्म के समय लक्षण दिखाई दे सकते हैं या कुछ समस्याएँ बाद में विकसित हो सकती हैं। इनमें हड्डियों की असामान्यताएँ, यकृत और प्लीहा का बढ़ना, त्वचा पर चकत्ते तथा सुनने या देखने से जुड़ी समस्याएँ शामिल हो सकती हैं।

इस जोखिम को कम करने के लिए गर्भावस्था की शुरुआत में सिफलिस की जाँच और आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपचार महत्वपूर्ण है। गर्भवती महिला में संक्रमण की पुष्टि होने पर डॉक्टर की देखरेख में उचित पेनिसिलिन उपचार दिया जाता है।

महिलाओं में सिफलिस से बचाव कैसे करें? How Can Syphilis be Avoided?

महिलाओं में सिफलिस से बचाव के लिए सुरक्षित यौन व्यवहार, नियमित STI जाँच और संक्रमण की समय पर पहचान महत्वपूर्ण हैं। कुछ सावधानियाँ अपनाकर संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • कंडोम का सही उपयोग करें: योनि, गुदा या मुख मैथुन के दौरान कंडोम का उपयोग सिफलिस के जोखिम को कम कर सकता है, लेकिन यह संक्रमित घावों से पूरी सुरक्षा नहीं देता, यदि वे कंडोम से ढके न हों।

  • नियमित STI जाँच करवाएँ: यौन रूप से सक्रिय महिलाओं को, विशेषकर संक्रमण का जोखिम होने पर, डॉक्टर की सलाह के अनुसार सिफलिस और अन्य यौन संचारित संक्रमणों की जाँच करवानी चाहिए।

  • संक्रमित साथी की जाँच और उपचार करवाएँ: यदि आपके साथी में सिफलिस की पुष्टि हुई है, तो स्वयं भी चिकित्सकीय सलाह लें और आवश्यक जाँच व उपचार करवाएँ।

  • असामान्य घावों को नज़रअंदाज़ न करें: योनि, जननांगों, गुदा या मुँह के आसपास दर्द रहित घाव या असामान्य चकत्ते दिखाई देने पर डॉक्टर से परामर्श लें।

  • गर्भावस्था के दौरान जाँच करवाएँ: गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सिफलिस की जाँच करवानी चाहिए। समय पर निदान और पेनिसिलिन से उचित उपचार माँ से बच्चे में संक्रमण फैलने के जोखिम को कम कर सकते हैं।

  • उपचार के बाद फॉलो-अप करें: यदि सिफलिस का उपचार हुआ है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार रक्त जाँच करवाएँ और दोबारा संक्रमण से बचने के लिए आवश्यक सावधानियाँ अपनाएँ।

ध्यान दें: सिफलिस का उपचार हो जाने के बाद भी दोबारा संक्रमण हो सकता है। इसलिए संक्रमण की आशंका होने पर जाँच करवाना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेना आवश्यक है।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है:

  • जननांगों या मुँह में घाव: बिना दर्द वाले घाव या छाले दिखाई देने पर सिफलिस की जाँच करवाएँ।

  • त्वचा पर असामान्य चकत्ते: हथेलियों, पैरों के तलवों या शरीर के अन्य हिस्सों पर चकत्ते दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

  • संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना: यदि आपके यौन साथी में सिफलिस की पुष्टि हुई है, तो लक्षण न होने पर भी जाँच और उपचार के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

  • बार-बार बुखार या थकान: त्वचा पर चकत्तों, गले में खराश या लिम्फ नोड्स में सूजन के साथ ये लक्षण दिखाई दें, तो जाँच करवाएँ।

  • दृष्टि या सुनने में बदलाव: अचानक दृष्टि कम होना, आँखों में दर्द या सुनने की क्षमता में कमी होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।

  • गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षण: तेज सिरदर्द, भ्रम, कमजोरी या शरीर के संतुलन में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

महत्वपूर्ण: सिफलिस के लक्षण अपने आप ठीक हो जाने पर भी संक्रमण समाप्त होना जरूरी नहीं है। संक्रमण का संदेह होने पर जाँच में देरी न करें, क्योंकि समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष:

सिफलिस एक उपचार योग्य यौन संचारित संक्रमण है, लेकिन समय पर निदान और उचित उपचार न मिलने पर यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों में दर्द रहित घाव और त्वचा पर चकत्ते शामिल हो सकते हैं, जबकि कुछ लोगों में संक्रमण बिना स्पष्ट लक्षणों के भी मौजूद रहता है।

रक्त जाँच, डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक उपचार, यौन साथी की जाँच और नियमित फॉलो-अप सिफलिस के प्रबंधन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। सुरक्षित यौन व्यवहार और गर्भावस्था के दौरान समय पर जाँच से संक्रमण के फैलाव तथा इससे जुड़ी जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

यदि आपको सिफलिस का संदेह है, तो जाँच कराने में देरी न करें। तो टेस्ट करवाने में देर न करें। सही समय पर इलाज के लिए अपने आस-पास के गायनेकोलॉजिस्ट (gynaecology doctor near you) से मिलें, ताकि संक्रमण का असरदार इलाज हो सके।

मिरेकल्स हेल्थकेयर गुड़गांव में स्थित एक गायनेकोलॉजिस्ट हॉस्पिटल (gynaecologist hospital in Gurgaon) है, जो 2002 से मैटरनिटी और गायनेकोलॉजी से जुड़ी सेवाएं दे रहा है। यहां 50 से ज़्यादा अनुभवी महिला गायनेकोलॉजिस्ट की टीम है, जो लक्षणों की जांच करती हैं, समस्या की असली वजह को समझती हैं और आपकी स्थिति के हिसाब से सही इलाज के बारे में सलाह देती हैं। इसके अलावा, अस्पताल में गायनेकोलॉजी के साथ-साथ अन्य विशेषज्ञताओं की मल्टीस्पेशियलिटी सेवाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के लिए एक ही हेल्थकेयर नेटवर्क के अंतर्गत परामर्श और देखभाल मिल सकती है।  गुड़गांव के सेक्टर 14, सेक्टर 56 और सेक्टर 82 में स्थित केंद्रों के माध्यम से मरीज अपनी लोकेशन के अनुसार सुविधाजनक केंद्र चुन सकते हैं, जिससे परामर्श और नियमित फॉलो-अप के लिए आने-जाने में आसानी होती है। कंसल्टेशन बुक करने के लिए 906-906-8800 पर कॉल करें।

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Frequently Asked Questions

डॉ. साधना बताती हैं सिफलिस का उपचार संक्रमण के चरण पर निर्भर करता है। शुरुआती सिफलिस में पेनिसिलिन की एक खुराक पर्याप्त हो सकती है, लेकिन संक्रमण पूरी तरह नियंत्रित होने की पुष्टि के लिए फॉलो-अप जाँच आवश्यक है।

सिफलिस में किसी विशेष भोजन से परहेज करना आवश्यक नहीं है। संतुलित आहार लें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार पूरा करें।

सिफलिस की जाँच के लिए VDRL और RPR जैसे रक्त परीक्षण किए जाते हैं। संक्रमण की पुष्टि के लिए अतिरिक्त ट्रेपोनेमल टेस्ट भी किया जा सकता है।

बिना उपचार के सिफलिस मस्तिष्क, नसों, आँखों, हृदय और रक्त वाहिकाओं सहित शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकता है।

हाँ, सिफलिस का उचित एंटीबायोटिक उपचार से इलाज संभव है। हालांकि, पहले से हुए कुछ अंगों के नुकसान को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता।

सिफलिस Treponema pallidum नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्य रूप से संक्रमित घावों के सीधे यौन संपर्क से फैलता है और गर्भावस्था के दौरान माँ से बच्चे में भी पहुँच सकता है।