पीसीओएस के कारण, लक्षण और उपचार (PCOS in Hindi)

आधुनिक जीवनशैली और खानपान की बदलती अदातों के साथ, स्त्रीयों में हृदय-रोग, मधुमेह, और पीसीओएस (PCOS) जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। विशेषकर महिलाओं में पोलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) की समस्या में वृद्धि हो रही है। PCOS के लक्षण, कारण और निदान को समझना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि इस समस्या से राहत पाई जा सके।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) लगभग 8–13% प्रजनन आयु वाली महिलाओं को प्रभावित करता है। दुनिया भर में 70% तक प्रभावित महिलाओं का निदान नहीं हो पाता है।

इसलिए, आज इस Blog के माध्म से हम आपको PCOS के लक्षण, कारण और निदान के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे। अगर आप PCOS से परेशान हैं, तो यह Blog आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है।

PCOS क्या होता है ? PCOS in Hindi

Miracles Apollo Cradle के विशेषज्ञ गाइनेकोलॉजिस्ट Dr. Sadhna Sharma का कहना है पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं की समस्या है जिससे प्रजनन काल में हार्मोन असंतुलन होता है।इस स्थिति में, महिलाओं के शरीर में Androgen (पुरुष हार्मोन)का स्तर बढ़ जाता है और ओवरीज (ovary) में एक से अधिक सिस्ट (cyst) बन जाते हैं। जिसके कारण आंतरिक अंगों की कार्य पद्धति पर असर पड़ता है। आमतौर पर, यह समस्या genetic या मोटापे से होती है, लेकिन तनाव या Depression भी इसका मुख्य कारण बन सकते हैं। जब महिलाएं PCOS से प्रभावित होती हैं, तो उन्हें अनियमित मासिक धर्म, बालों का झड़ना, सिरदर्द, चेहरे पर मुहांसे, पेट में दर्द, और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

पीसीओएस (PCOS) किस उम्र में शुरू होता है?

पीसीओएस की समस्या आमतौर पर पहले मासिक धर्म की उम्र में दिखाई देने लगती है, जब महिला के शरीर में hormones में बदलाव होने लगते हैं। लेकिन कुछ महिलाओं को बालिग होने के बाद भी यह समस्या हो सकती है। इसे आमतौर पर किशोरावस्था और युवावस्था में देखा जाता है, लेकिन कई महिलाओं को यह समस्या जीवन के किसी भी समय में हो सकती है।

यहाँ उम्र का दृष्टिकोण विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अंडाशयों की समस्याएं आमतौर पर महिलाओं के प्रजनन (Reproduction) की उम्र में आती हैं। जब महिला की उम्र बढ़ती है, तो प्रजनन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है और इसलिए पीसीओएस (PCOS) के लक्षण और प्रभाव को समय रहते पहचानना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) के लक्षण क्या हैं? - Symptoms of PCOS in Hindi

पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के लक्षण विभिन्न महिलाओं में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्य रूप से निम्नलिखित लक्षण होते हैं:

  • अनियमित मासिक धर्म (Irregular Periods): मासिक धर्म की अनियमितता, यानी असमयित (asymmetric) और अनियमित Periods PCOS का सबसे सामान्य लक्षण है।

  • हिर्सुटिज़म (Hirsutism): अत्यधिक शरीर पर बालों का विकास होना, जैसे कि उपरी होंठों, गले, छाती, पेट, और पैरों पर।

  • अधिक वजन: बढा हुआ वजन (overweight) और मोटापा (obesity) PCOS के एक और सामान्य लक्षण हो सकते हैं।

  • चेहरे पर अक्ने (Acne): चेहरे पर मुहांसे और दाने होना भी एक लक्षण हो सकता है, विशेष रूप से जब यह बार-बार होता है।

  • ओवुलेशन (Ovulation) की समस्या: कुछ महिलाओं में अनयमित (irregular)या अभावी ओवुलेशन (lacking of ovulation)की समस्या हो सकती है, जो गर्भाधान (conception) की क्षमता पर प्रभाव डाल सकती है।

  • आलस्य या थकान: PCOS के साथ, थकान और आलस्य की समस्या हो सकती है, जो हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है।

  • अंडाशयों में सिस्ट (Ovarian Cyst): PCOS के विकास के साथ, अंडाशयों ( ovaries) में cysts या गांठे हो सकती हैं, जो सामान्य रूप से उपलब्ध रहती हैं।

  • हाइपरअंड्रोजेनिस्म (Hyperandrogenism): अधिक पुरुष हार्मोन के संतुलन में वृद्धि होती है, जिससे अंड्रोजेन के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे कि विष्ठा के बढ़ना, मुँहासे, या गर्म और्र्यूशन।

  • पित्ताशय के दर्द या फैलिपूशन: PCOS के साथ, पित्ताशय में दर्द (gallbladder pain)या फैलिपूशन की समस्या हो सकती है । 

यदि आपको इन लक्षणों में से कुछ भी महसूस होता है, तो आपको Gynecologist से सलाह लेनी चाहिए । क्योंकि उपयुक्त जांच के माध्यम से ही सही तरीके से इलाज किया जा सकता है।

पीसीओएस (PCOS) के कारण क्या हैं? - Causes of PCOS in Hindi

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) के कारण अधिकतर मामलों में हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) होता है, जो महिलाओं के ओवेरीज (ovaries) के सही फंक्शनिंग पर असर डालता है। कुछ मुख्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • अतिरंजन खानपान (exaggerated eating)

  • अनियमित व्यायाम (irregular exercise)

  • जननिक कारण (genetic factors)

  • हार्मोन का असंतुलन (hormonal imbalance)

  • अतिरंजन स्ट्रेस (stress)

  • अंतःस्रावी रोगों का इतिहास (medical history of endocrine diseases)

  • मोटापा (overweight or obesity)

यह सभी कारण PCOS के विकास में योगदान कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि प्रत्येक महिला की स्थिति अलग हो सकती है और उनकी पूर्ण चिकित्सा इतिहास का विश्लेषण करने ( to analyze her complete medical history) के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से परामर्श लेना जरूरी है।

पीसीओएस (PCOS) का निदान कैसे किया जाता है? - Diagnosis for PCOS in Hindi

PCOS का निदान (diagnosis) करने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ महिला की medical history लेते हैं और उनके लक्षणों का मूल्यांकन करते हैं। उन्हें निम्नलिखित परीक्षणों और जाँचों का सुझाव देते हैं:

  • रोगी का इतिहास (मेडिकल हिस्ट्री) लेना: चिकित्सक पहले रोगी का इतिहास लेते हैं, जिसमें मासिक धर्म की समस्याएं, वजन बढ़ने की समस्या, हिर्सुटिज़म और अन्य संबंधित लक्षणों का विवरण होता है।

  • शारीरिक परीक्षण: चिकित्सक शारीरिक परीक्षण करके महिला के शारीरिक लक्षणों की जांच करते हैं। इसमें वजन, रक्तचाप, और गर्भाशय के आकार की जांच शामिल हो सकती है।

लेब टेस्ट्स: 

  • हॉर्मोनल परीक्षण (Hormonal Tests): रक्त में हॉर्मोन के स्तर की जाँच, जैसे कि अंड्रोजन, प्रोगेस्ट्रोन, और एस्ट्रोजन, चिकित्सक को महिला के हॉर्मोनल स्तर को समझने में मदद करता है।

  • इन्सुलिन अनुसंधान (Insulin Test): इन्सुलिन की स्तिथि की जाँच के लिए किया जाता है, क्योंकि PCOS में इन्सुलिन की स्तिथि के असंतुलन का अंगीकार होता है।

इमेजिंग टेस्ट्स

  • सोनोग्राफी (Ultrasound): गर्भाशय के अंदर की गांठों को देखने के लिए उल्ट्रासाउंड या सोनोग्राफी की जाती है। 

यह सभी परीक्षण और जाँचें मिलकर डॉक्टर को यह जानने में मदद करती हैं कि क्या महिला PCOS समस्या से पीड़ित है या नहीं।

पीसीओएस का उपचार -Treatment of PCOS in Hindi

आपकी स्त्री रोग विशेषज्ञ पोलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का इलाज आपके लक्षणों, चिकित्सा इतिहास (medical history) और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों (health conditions) और यदि आप गर्भवती होना चाहती हैं, के आधार पर तय करेंगी।

PCOS के इलाज के कुछ सामान्य उपाय हैं:

  • जीवन शैली में परिवर्तन(Lifestyle Modification):

  1. फल, सब्जियों, दर्दार प्रोटीन, और पूरे अनाज से भरपूर स्वस्थ आहार लें।

  2. रोजाना व्यायाम, जैसे कि एयरोबिक गतिविधियों (aerobic exercises), शक्ति ट्रेनिंग (strength training) , या योग, जो इंसुलिन संवेदनशीलता (insulin sensitivity)और वजन प्रबंधन (weight management) में मदद कर सकते हैं।

  • दवाएं (Medications):

    1. मासिक धर्म को नियमित करने (Regulate menstruation) और अंड्रोजन स्तर को कम करने के लिए गर्भनिरोध गोलियाँ।

    2. हिर्सुटिज़म और मुँहासों जैसे लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए एंटी-एंड्रोजन दवाएँ (Anti-androgen medications)

    3. मेटफॉर्मिन (Metformin), खासकर इनसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance )वाली महिलाओं में इंसुलिन संवेदनशीलता को सुधारने (improve insulin sensitivity)और मासिक धर्म को नियमित करने के लिए(regulate menstruation)

  • फर्टिलिटी उपचार (Fertility Treatment):

    1. यदि आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे हैं, तो डॉक्टर अंडानुत्तेजन को उत्पन्न करने के लिए (induce ovulation) क्लोमिफेन या लेट्रोजोल जैसी दवाएँ निर्धारित (recommend) कर सकते हैं।

  • प्राकृतिक और वैकल्पिक उपचार (Natural and Alternative Treatments):

    1. कुछ लोग प्राकृतिक और वैकल्पिक उपचार, जैसे कि जड़ी-बूटियों, एलोपैथिक उपचार (allopathic treatment) और डाइटरी सप्लीमेंट्स (dietory supplements) की मदद से PCOS के लक्षणों में राहत प्राप्त करते हैं।

    2. हालांकि, किसी भी वैकल्पिक चिकित्सा (alternate medication) की कोई भी कोशिश करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से परामर्श लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • नियमित जाँच-परख:

    1. आपके स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynaecologists) के साथ नियमित फॉलो-अप अपॉइंटमेंट लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

PCOS का सही निदान और उपचार शुरू में ही बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे न केवल इन्फर्टिलिटी (infertility) का खतरा कम होता है, बल्कि यह अन्य संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का भी संभावित खतरा कम करता है। यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि हर महिला की स्थिति अलग हो सकती है, और सही उपचार के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

PCOS से बचाव के उपाय - Prevention of PCOS in Hindi

PCOS का प्रतिरोध निम्नलिखित कदमों के माध्यम से किया जा सकता है:

  • स्वस्थ आहार: नियमित और स्वस्थ आहार लेना PCOS के खतरे को कम कर सकता है। 

  • नियमित व्यायाम: नियमित शारीरिक गतिविधि करना, जैसे कि योग, व्यायाम, और ध्यान, PCOS के लक्षणों को कम कर सकता है और हार्मोन्स को संतुलित रख सकता है।

  • वजन प्रबंधन: वजन प्रबंधन और ओबीसिटी को नियंत्रित करना PCOS के खतरे को कम कर सकता है। सही वजन प्रबंधन के लिए स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम महत्वपूर्ण है।

  • स्ट्रेस प्रबंधन: स्ट्रेस (stress) को कम करने के लिए योग, मेडिटेशन, या अन्य शारीरिक और मानसिक तंत्रिका (other physical and mental exercises)का अनुसरण(Pursue) करें, क्योंकि यह हार्मोन्स को संतुलित रखने में मदद कर सकता है।

  • नियमित चेकअप: नियमित चेकअप के माध्यम से डॉक्टर से जाँच करवाना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित लक्षण को समय पर पहचाना जा सके और सही उपचार दिया जा सके।

इन उपायों को अपनाने से PCOS के खतरे को कम किया जा सकता है और स्वस्थ जीवन शैली को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। फिर भी, किसी भी स्वास्थ्य समस्या के मामले में अपने चिकित्सक से परामर्श करना हमेशा जरूरी है।

पीसीओएस और गर्भधारण - PCOS and Pregnancy in Hindi

पीसीओएस (PCOS) की गर्भाधान की क्षमता पर भी प्रभाव डाल सकती है। गर्भधारण के लिए यह समस्या अधिकतर महिलाओं को परेशान कर सकती है। PCOS के कारण अंडाशय में अंधकारित रूप से अंडे बनते हैं और गर्भाशय में पहुंचने में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा, अनियमित मासिक धर्म भी गर्भधारण की समस्या को बढ़ा सकता है। अगर किसी महिला को PCOS है, तो उसे गर्भधारण के लिए अधिक दिक्कतें हो सकती हैं। लेकिन सही चिकित्सा (Right treatment) और आहार व्यवस्था (diet plan) के माध्यम से, गर्भधारण की संभावना को बढ़ाया जा सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पीसीओएस (PCOS) वाली महिलाएं कभी भी गर्भाधान नहीं कर सकती हैं। वे भी गर्भाधान कर सकती हैं, लेकिन यह उनके लिए कुछ अतिरिक्त परिश्रम की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए, गर्भधारण की इच्छुक महिलाओं को अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ (gynecologist) से सलाह लेनी चाहिए और सही उपाय के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। उन्हें उनकी स्थिति के आधार पर सही उपाय और उपचार का सुझाव दिया जाएगा। वे स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, और दवाओं के साथ सही जीवनशैली का पालन कर सकती हैं जिससे उनकी गर्भाधान की क्षमता में सुधार हो सकता है।

सारांश - Conclusion in Hindi: 

पीसीओएस एक ऐसी स्थिति है जिसका प्रबंधन (managed) सही उपायों के साथ संभव है। यदि आपको पीसीओएस (PCOS) की समस्या है, तो इसे नकारात्मक रूप से नहीं देखें, बल्कि उचित दिशा में कदम उठाएं। स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, और स्ट्रेस प्रबंधन के उपाय अकेले ही पीसीओएस के लक्षणों को कम कर सकते हैं। साथ ही, समस्या के सही समाधान और उपचार के लिए नियमित चेकअप और चिकित्सा परामर्श महत्वपूर्ण हैं । अतः, उम्मीद न खोएं और इस मुश्किल समय में अपने नजदीकी स्त्री रोग विशेषज्ञ से सहयोग और सलाह परामर्श लें । अगर आप उचित दिशा में कदम उठाएंगे, तो स्वस्थ और सकारात्मक जीवन जीने में सक्षम होंगे।

मिरेकल्स हेल्थकेयर (Miracles Healthcare Gurgaon) पीसीओएस समस्याओं के इलाज के प्रमुख अस्पतालों में से एक है। गुड़गांव में स्थित इस अस्पताल में महिला रोगों के उपचार के लिए विशेषज्ञ स्त्री रोग विशेषज्ञों (gynecologist in gurgaon) की टीम है। इस अस्पताल में महिलाओं के स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याओं का निदान और उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। 

यदि आप किसी महिला स्वास्थ्य संबंधी समस्या और आपके लिए सर्वोत्तम संभव उपचार योजना के बारे में जानना चाहती हैं, तो हमारे स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें ।


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