महिलाओं की आम बीमारी PCOS अब कहलाएगी PMOS, जानिए आखिर क्यों बदलना पड़ा इसका पुराना नाम

Summary

PCOS, जो महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल समस्या है, अब कई विशेषज्ञों द्वारा PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) नाम से पहचानी जा रही है। यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यह समस्या सिर्फ ओवरी नहीं, बल्कि पूरे शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है।

Overview

हाल ही में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर महिलाओं से जुड़ी इस हार्मोनल समस्या के नए नाम को लेकर काफी चर्चा हो रही है, जिससे कई लोग कन्फ्यूज हो गए हैं। दुनियाभर में हर 8 में से 1 महिला को प्रभावित करने वाली इस स्थिति को पहले Polycystic Ovary Syndrome कहा जाता था, लेकिन अब इसे Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome नाम दे दिया गया है। लेकिन आखिर यह बदलाव क्यों किया है? क्या बीमारी बदल गई है या सिर्फ उसका नाम? दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि पुराना नाम इस समस्या को पूरी तरह सही तरीके से नहीं दर्शाता। यह केवल ओवरी या सिस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और कई अंगों को प्रभावित करने वाली एक जटिल स्थिति है। 

इसी सोच के साथ “PMOS” नाम सामने आया है, ताकि महिलाओं को इस समस्या की बेहतर समझ मिल सके और समय पर सही इलाज व देखभाल मिल पाए। अगर आपके मन में भी PMOS को लेकर सवाल हैं, तो इस ब्लॉग में जानिए PMOS क्या है, इसका PCOS से क्या संबंध है, इसके लक्षण, कारण और उपचार क्या हैं।

पीसीओएस क्या है? What is PCOS?

Polycystic Ovary Syndrome महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल समस्या है इस स्थिति में शरीर के हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसकी वजह से पीरियड्स अनियमित (irregular periods) हो सकते हैं, वजन तेजी से बढ़ सकता है और गर्भधारण में परेशानी आ सकती है। आज के समय में कई युवा लड़कियां और महिलाएं इस समस्या से प्रभावित हैं।

मिरेकल्स हेल्थकेयर गुरुग्राम की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ (gynaecologist in Gurgaon) डॉ. अमरापाली दीक्षित के अनुसार, , “अक्सर महिलाएं अनियमित पीरियड्स या वजन बढ़ने को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन कई बार यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। समय पर जांच और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस स्थिति को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।”

वह आगे बताती हैं, “यह सिर्फ पीरियड्स की समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर महिलाओं की फर्टिलिटी, स्किन, वजन और ओवरऑल हेल्थ पर भी पड़ सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षण दिखने पर गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहद जरूरी है।”

पीएमओएस क्या है? What is PMOS?

Poly Metabolic Ovary Syndrome को कुछ एक्सपर्ट्स द्वारा महिलाओं में होने वाली इस हार्मोनल समस्या के नए नाम के रूप में चर्चा में लाया जा रहा है। डॉक्टरों और रिसर्चर्स का मानना है कि पहले इस्तेमाल किया जाने वाला नाम इस बीमारी को पूरी तरह सही तरीके से नहीं दर्शाता। कई महिलाओं में ओवरी में सिस्ट नहीं होते, फिर भी उन्हें यह समस्या होती है। वहीं इसका असर सिर्फ ओवरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्मोन, वजन और इंसुलिन लेवल पर भी पड़ता है।

इसी वजह से कई विशेषज्ञ “Polymetabolic Ovary Syndrome” नाम को ज्यादा सटीक मानते हैं, क्योंकि यह बीमारी की वास्तविक प्रकृति को बेहतर तरीके से दर्शाता है।

Dr. Amrapali Dixit कहती हैं, “कई महिलाओं को लगता है कि यह सिर्फ ओवरी में सिस्ट बनने की समस्या है, जबकि असल में इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। हार्मोनल बदलाव के साथ-साथ यह वजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और फर्टिलिटी को भी प्रभावित कर सकता है।”

वह आगे बताती हैं, “नए नाम का उद्देश्य महिलाओं को यह समझाना है कि यह केवल एक गायनेकोलॉजिकल समस्या नहीं, बल्कि मेटाबॉलिक और हार्मोनल हेल्थ से जुड़ी स्थिति भी है। सही समय पर पहचान और लाइफस्टाइल बदलाव से इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।”

PCOS से PMOS नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?  Why was there a need to change the name from PCOS to PMOS?

1. हर महिला में सिस्ट नहीं होते: PCOS नाम सुनकर लगता है कि ओवरी में सिस्ट होना जरूरी है। लेकिन कई महिलाओं में सिस्ट नहीं होते, फिर भी उन्हें यह समस्या होती है।

2. यह सिर्फ ओवरी की बीमारी नहीं: इस समस्या का असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ता है, जैसे:

  • वजन

  • इंसुलिन लेवल

  • हार्मोन

  • स्किन

  • फर्टिलिटी

  • मानसिक स्वास्थ्य

3. मेटाबॉलिक समस्याएं ज्यादा अहम हैं: कई मरीजों में डायबिटीज, मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। इसीलिए “Polymetabolic” शब्द जोड़ा गया।

इस विषय पर बात करते हुए डॉ. अमरापाली कहती हैं कि पीसीओएस केवल अंडाशय की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक हार्मोनल और चयापचय संबंधी स्थिति है जो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। आजकल कई महिलाएं इसे मासिक धर्म की समस्या मानकर नज़रअंदाज़ कर देती हैं, लेकिन यह शरीर के कई महत्वपूर्ण तंत्रों को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि इस बीमारी का बेहतर वर्णन करने के लिए पीएमओएस शब्द का प्रयोग किया गया।

21+ वर्षों के अनुभव के साथ Dr. Amrapali हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, नॉर्मल डिलीवरी और सीजेरियन डिलीवरी के मैनेजमेंट में विशेषज्ञता रखती हैं अपनी प्रोफेशनल स्किल्स के साथ-साथ उनका शांत स्वभाव और मरीजों के प्रति empathetic approach उन्हें महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय बनाता है।

पीसीओएस/पीएमओएस के लक्षण क्या हैं?  What are the common symptoms of PCOS/PMOS?

हर महिला में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में हल्के लक्षण होते हैं, जबकि कुछ में यह ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।

1. अनियमित पीरियड्स: यह PMOS का सबसे सामान्य लक्षण माना जाता है।

2. तेजी से वजन बढ़ना: खासकर पेट के आसपास फैट जमा होना।

  • चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल

  • अपर लिप

  • चिन

  • छाती

  • पेट

3. मुंहासे और ऑयली स्किन: हार्मोनल बदलाव की वजह से स्किन पर असर दिखाई दे सकता है।

4. बाल झड़ना: सिर के बाल पतले होने लगते हैं या हेयर फॉल बढ़ सकता है।

5. प्रेग्नेंसी में दिक्कत: ओव्यूलेशन सही तरीके से न होने पर कंसीव करने में परेशानी हो सकती है।

 6. मूड स्विंग्स और तनाव

  • चिड़चिड़ापन

  • एंग्जायटी

  • तनाव

  • लो कॉन्फिडेंस

7. थकान महसूस होना: कई महिलाओं को लगातार थकान और कमजोरी महसूस होती है।

पीसीओएस/पीएमओएस होने के कारण क्या हैं? What are the causes of PCOS/PMOS?

PMOS का एक सटीक कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन कई फैक्टर्स इसके पीछे जिम्मेदार माने जाते हैं।

  • हार्मोनल असंतुलन: महिलाओं के शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से यह समस्या हो सकती है।

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: जब शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर और वजन बढ़ने लगता है।

  • जेनेटिक कारण: अगर परिवार में किसी महिला को PCOS/PMOS रहा है, तो इसका जोखिम बढ़ सकता है।

  • मोटापा: अधिक वजन हार्मोनल बदलाव को बढ़ा सकता है।

    • खराब लाइफस्टाइल

    • जंक फूड

    • कम फिजिकल एक्टिविटी

    • अनियमित नींद

ये सभी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

  • तनाव: लगातार तनाव हार्मोनल हेल्थ को प्रभावित कर सकता है।

पीएमओएस/पीसीओएस का इलाज क्या है? What is the treatment for PMOS/PCOS?

सही इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव से PMOS को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।

1. हेल्दी डाइट अपनाएं

  • ज्यादा फाइबर लें

  • प्रोटीन बढ़ाएं

  • मीठा और प्रोसेस्ड फूड कम करें

  • हरी सब्जियां और फल खाएं

2. रोज एक्सरसाइज करें: रोजाना 30-45 मिनट वॉक, योग या वर्कआउट करने से वजन और हार्मोन दोनों कंट्रोल में रह सकते हैं।

3. वजन कम करें: सिर्फ 5-10% वजन कम करने से भी पीरियड्स और ओव्यूलेशन में सुधार देखा जा सकता है

3. तनाव कम करें

  • मेडिटेशन

  • योग

  • पर्याप्त नींद

काफी मददगार हो सकते हैं।

4. डॉक्टर की सलाह से दवाइयां लें: कुछ मामलों में डॉक्टर हार्मोनल दवाइयां, इंसुलिन कंट्रोल करने वाली दवाइयां या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट भी सलाह दे सकते हैं।

Dr. Amrapali कहती हैं, “हर महिला में PMOS के लक्षण और गंभीरता अलग हो सकती है। इसलिए इलाज भी मरीज की जरूरत के हिसाब से प्लान किया जाता है।”

निष्कर्ष:

PMOS सिर्फ पीरियड्स की समस्या नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की ओवरऑल हेल्थ को प्रभावित करने वाली स्थिति है। अगर आपको अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, चेहरे पर बाल आना या प्रेग्नेंसी में परेशानी जैसी समस्याएं महसूस हो रही हैं, तो समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। यदि आपको पीएमओएस के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो देरी न करें, मिरेकल्स हेल्थकेयर में अपने नजदीकी स्त्री रोग विशेषज्ञ (gynaecologist near you) से समय पर परामर्श लें

सही समय पर इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल आपकी हार्मोनल हेल्थ को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

गुरुग्राम में PMOS उपचार के लिए मिरेकल्स हेल्थकेयर क्यों चुनें?

  • 2002 से गुरुग्राम में विश्वसनीय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में सेवाएं प्रदान कर रहा है

  • अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों और हार्मोनल हेल्थ एक्सपर्ट्स की टीम

  • PMOS/PCOS की सही जांच और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान

  • एडवांस डायग्नोस्टिक, अल्ट्रासाउंड और लैब सुविधाएं एक ही जगह पर उपलब्ध

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Frequently Asked Questions

क्योंकि यह समस्या सिर्फ ओवरी तक सीमित नहीं होती, बल्कि हार्मोन, मेटाबॉलिज्म, इंसुलिन और पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इसलिए PMOS नाम को ज्यादा सटीक माना जा रहा है।

हाँ, कई महिलाओं में पीसीओएस के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, हाई ब्लड शुगर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी मेटाबॉलिक समस्याएं देखी जाती हैं।

कुछ विशेषज्ञ अब PCOS की जगह PMOS शब्द इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन अभी भी अधिकतर जगहों पर PCOS नाम ही प्रचलित है।

PCOS वाली महिलाओं में अक्सर Vitamin D, Vitamin B12 और Iron की कमी देखी जाती है, लेकिन सही जांच के बाद ही सप्लीमेंट लेना चाहिए।

यह हर महिला में अलग हो सकता है। सही इलाज, वजन कंट्रोल और ओव्यूलेशन मैनेजमेंट से कई महिलाएं कुछ महीनों में कंसीव कर सकती हैं।

अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह डायबिटीज, मोटापा, हाई BP और फर्टिलिटी समस्याओं का कारण बन सकता है।

Tirzepatide कुछ मामलों में वजन और इंसुलिन कंट्रोल के लिए उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसे केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।

मिरेकल्स हेल्थकेयर गुरुग्राम का एक विश्वसनीय मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल है, जो 2002 से 50 से अधिक महिला स्त्री रोग विशेषज्ञों की टीम के मार्गदर्शन में महिलाओं की हार्मोनल और प्रजनन संबंधी समस्याओं के उपचार में सेवाएं प्रदान कर रहा है।

आप अपने नजदीकी मिरेकल्स हेल्थकेयर में अनुभवी Gynaecologist से परामर्श लेकर PMOS/PCOS का सही इलाज शुरू कर सकती हैं।

आप मिरेकल्स हेल्थकेयर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं या सीधे अस्पताल से संपर्क कर सकते हैं।