रोते बच्चे को शांत करने के 7 आसान तरीके

Summary

बच्चे का बार-बार रोना कई बार माता-पिता के लिए तनाव की वजह बन जाता है। ऐसे समय में कुछ सरल और सुरक्षित तरीके बच्चे को आराम देने में मदद कर सकते हैं। सही पकड़, शांत माहौल और बच्चे की छोटी-छोटी ज़रूरतों पर ध्यान देने से स्थिति बेहतर हो जाती है। समय पर सही देखभाल से बच्चा भी सुकून महसूस करता है और घर का माहौल शांत रहता है।

शायद आपने  गौर किया होगा होगा, छोटे बच्चे जब रोना शुरू करते हैं तो कई बार तो चुप ही नहीं होते। कई बार बच्चे भूख, नींद, या असुविधा के कारण रोते हैं, लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो बिना किसी कारण के लगातार रोते रहते हैं। इस वजह से माता-पिता बहुत परेशान हो जाते हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि बच्चे को कैसे शांत किया जाए। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो यह ब्लॉग आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। इस ब्लॉग में, गुरुग्राम में स्थित मिरेकल्स हेल्थकेयर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव मंधान, रोते हुए बच्चे को शांत करने के तरीके बताते हैं।

बच्चे के रोने के पीछे क्या कारण होते हैं? Baby Crying Causes

बच्चा जब रोता है, तो वह दरअसल अपनी परेशानी या ज़रूरत आप तक पहुँचाने की कोशिश कर रहा होता है। क्योंकि वह बोल नहीं सकता, इसलिए रोना ही उसका सबसे आसान तरीका होता है। बच्चे के रोने के कुछ आम कारण ये हो सकते हैं:

  • भूख लगना: छोटे बच्चों को जल्दी-जल्दी भूख लगती है। जैसे ही पेट खाली होता है, बच्चा रोकर संकेत देने लगता है।

  • नींद पूरी न होना: अगर बच्चे को पूरी नींद नहीं मिलती, तो वह बेचैन और चिड़चिड़ा हो जाता है, जिससे रोना बढ़ सकता है।

  • पेट दर्द या गैस की समस्या: पेट में गैस (gas), अपच या हल्का दर्द भी बच्चे को बहुत परेशान कर सकता है और वह रोने लगता है।

  • गर्मी या ठंड ज्यादा लगना: बहुत गर्म या बहुत ठंडा माहौल बच्चे को असहज महसूस कराता है, जिससे वह रो सकता है।

  • कपड़े या डायपर से परेशानी: टाइट डायपर (tight diaper), गीले कपड़े या खुरदरे फैब्रिक भी बच्चे को चुभ सकते हैं और रोने की वजह बन सकते हैं।

इन कारणों को समझकर अगर समय पर सही कदम उठाए जाएँ, तो बच्चे को जल्दी शांत किया जा सकता है।

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रोते हुए बच्चे को तुरंत शांत करने के कारगर तरीके How to make babies stop crying?

1. सबसे पहले बच्चे की ज़रूरत को समझें

डॉ. गौरव के अनुसार, बच्चे को शांत कराने से पहले यह जानना बेहद ज़रूरी है कि वह रो क्यों रहा है। क्या उसे भूख लगी है, उसकी नैपी गीली तो नहीं है, या फिर उसे ज़्यादा गर्मी या ठंड लग रही है? कई बार छोटी-सी असुविधा भी बच्चे को बेचैन कर देती है। इसके अलावा, कमरे का तापमान बहुत कम या बहुत ज़्यादा होना भी बच्चे के रोने की एक वजह हो सकता है।

2. बच्चे को आरामदायक स्थिति में रखें

जब बच्चा रो रहा हो, तो सबसे पहले उसे सही तरीके से गोद में लेना बहुत ज़रूरी होता है। बच्चे को अपने सीने से सटाकर रखें ताकि उसे आपके दिल की धड़कन महसूस हो सके। यह एहसास उसे सुरक्षा और अपनापन देता है। इसके साथ ही हल्के हाथों से उसकी पीठ या गर्दन के पास धीरे-धीरे सहलाएं। यह तरीका बच्चे को मानसिक रूप से शांत करता है और वह खुद को सुरक्षित महसूस करने लगता है, जिससे उसका रोना धीरे-धीरे कम होने लगता है।

3. हल्की पट्टी या चादर में लपेटना (Swaddling)

नवजात और छोटे बच्चों के लिए हल्की चादर में आराम से लपेटना बहुत असरदार तरीका माना जाता है। स्वैडलिंग से बच्चे को वही सुकून महसूस होता है, जो उसे मां के गर्भ में मिलता था। इससे उसके हाथ-पैर अचानक हिलना कम हो जाते हैं और बेचैनी घटती है। ध्यान रखें कि चादर बहुत टाइट न हो, ताकि बच्चा आराम से सांस ले सके और उसे किसी तरह की परेशानी न हो।

4. डायपर और साफ-सफाई की जांच करें

कई बार बच्चे के रोने की वजह गीली या गंदी डायपर होती है। इसलिए बच्चे को शांत करने से पहले उसकी डायपर ज़रूर जांचें। अगर डायपर गीली है, तो तुरंत बदलें और बच्चे को साफ रखें। साफ-सफाई का ध्यान रखने से बच्चा ज्यादा आराम महसूस करता है और उसका मूड जल्दी ठीक हो जाता है।

5. हल्की और नियमित थपकियां दें (Gentle Patting)

बच्चे की पीठ या पेट पर धीरे-धीरे और एक समान थपकियां देना भी उसे शांत करने का एक अच्छा तरीका है। डॉ. गौरव के अनुसार, इस तरह की हल्की और नियमित थपकियां बच्चे के नर्वस सिस्टम को शांत करती हैं। इससे बच्चे को आराम महसूस होता है और वह जल्दी रिलैक्स होने लगता है। ध्यान रखें कि थपकियां बहुत तेज़ न हों, बल्कि नरम और सधी हुई हों।

6. सफ़ेद शोर या नर्म आवाज़ का सहारा लें

कभी-कभी पूरी शांति या बहुत तेज़ आवाज़, दोनों ही बच्चों को परेशान कर सकती हैं। ऐसे में हल्की और लगातार आने वाली आवाज़ें बच्चे को सुकून देती हैं। पंखे की आवाज़, धीमी लोरी, या सफ़ेद शोर बच्चे को आराम का एहसास कराता है। ये आवाज़ें उसे गर्भ के माहौल की याद दिलाती हैं, जिससे वह जल्दी शांत हो जाता है।

7. पेसिफ़ायर का सही इस्तेमाल

कुछ बच्चों के लिए चूसनी यानी पेसिफ़ायर बहुत जल्दी असर दिखाती है। इसे चूसने से बच्चे को आराम और सुरक्षा का एहसास होता है और उसका ध्यान रोने से हट जाता है। हालांकि, पेसिफ़ायर का इस्तेमाल हमेशा सीमित समय के लिए ही करना चाहिए, ताकि बच्चे को इसकी आदत न पड़े। जरूरत पड़ने पर ही इसका उपयोग करें।

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डॉक्टर से कब संपर्क करें?

हालांकि रोना सामान्य है, लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत ज़रूरी होता है। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें अगर:

  • बच्चा लगातार कई घंटों तक रोता रहे और शांत न हो

  • रोने के साथ बुखार, उल्टी या दस्त हो

  • बच्चा दूध पीना बंद कर दे

  • रोते समय बच्चा बहुत सुस्त या कमजोर लगे

  • पेट बहुत सख्त लगे या बच्चा पैर पेट की ओर मोड़कर रोए

  • रोने की आवाज सामान्य से बहुत तेज या अलग हो

यह किसी अंदरूनी समस्या, इंफेक्शन (infection) या पेट की परेशानी का संकेत हो सकता है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष:

बच्चे का रोना माता-पिता के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही जानकारी और सही तरीका अपनाकर इसे आसानी से संभाला जा सकता है। डॉक्टर द्वारा बताए गए ये आसान स्टेप्स अपनाने से ज़्यादातर बच्चे जल्दी शांत हो जाते हैं। हालांकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि हर बच्चा अलग होता है। अगर घरेलू तरीके काम न करें या बच्चे के व्यवहार में कुछ असामान्य लगे, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेना ही बेहतर होता है। सही समय पर सही देखभाल बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य की सबसे बड़ी कुंजी है।

अगर आपका बच्चा बार-बार रोता है या आपको उसकी सेहत को लेकर कोई चिंता है, तो मिरेकल्स हेल्थकेयर में अपने नजदीकी बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें समय पर विशेषज्ञ की सलाह न सिर्फ बच्चे को आराम देती है, बल्कि माता-पिता को भी मानसिक सुकून देती है। आज ही अपॉइंटमेंट लें और अपने बच्चे की सेहत को सुरक्षित रखें।

Miracles Healthcare गुड़गांव का एक विश्वसनीय मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल है, जहाँ एक ही छत के नीचे बच्चों, महिलाओं और बड़ों के लिए अलग-अलग विशेषज्ञताओं में इलाज की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ अनुभवी डॉक्टरों की टीम और आधुनिक मेडिकल सुविधाओं के साथ मरीजों को सुरक्षित, आरामदायक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।


Frequently Asked Questions

सबसे पहले बच्चे की भूख, नैपी, नींद और आराम चेक करें। अगर रोना लगातार बना रहे या असामान्य लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।

रात में गैस, भूख, नींद पूरी न होना या अचानक डर जाना रोने की आम वजहें हो सकती हैं। शांत माहौल और सही रूटीन बच्चे को आराम देने में मदद करते हैं।

पेशाब के समय जलन, संक्रमण, डायपर रैश या किसी तरह की असहजता के कारण बच्चा रो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी होता है।