हीमोग्लोबिन क्या है, कम होने का कारण, लक्षण और उपचार
हीमोग्लोबिन हमारे शरीर में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह खून में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो शरीर के हर अंग तक ऑक्सीजन पहुँचाने का काम करता है। जब हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है, तो शरीर में थकान, कमजोरी और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि हीमोग्लोबिन क्या है, इसके कम होने के कारण, लक्षण और उपचार क्या हैं।
हीमोग्लोबिन क्या है? What Hemoglobin Means?
हीमोग्लोबिन एक लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) में पाया जाने वाला प्रोटीन है। इसका मुख्य कार्य फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के सभी अंगों तक पहुँचाना और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालना है।
हीमोग्लोबिन की सामान्य मात्रा (hemoglobin normal value)
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पुरुषों में: 13.5 – 17.5 ग्राम/डीएल
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महिलाओं में: 12.0 – 15.5 ग्राम/डीएल
बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए अलग मानक होते हैं।
हीमोग्लोबिन की कमी को अनीमिया (anemia) कहा जाता है। यह एक आम समस्या है, जो हर उम्र में हो सकती है।
हीमोग्लोबिन कम होने के कारण Why is Hemoglobin Low?
आजकल हीमोग्लोबिन का स्तर कम होना काफी आम बात है, और इसके कई कारण हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
1. आयरन की कमी (Iron Deficiency)
हीमोग्लोबिन बनने के लिए आयरन सबसे जरूरी तत्व है। जब शरीर में आयरन की मात्रा कम हो जाती है, तो लाल रक्त कोशिकाएँ सही तरीके से नहीं बन पातीं। आयरन की कमी हीमोग्लोबिन घटने का सबसे आम कारण है। महिलाओं में भारी या लंबे समय तक मासिक धर्म होने के कारण यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। Dr. Sumit Gulla, सीनियर इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर, Miracles Healthcare, Gurgaon, के अनुसार “महिलाओं में लंबे समय तक या अधिक मात्रा में मासिक धर्म होने, असंतुलित आहार और समय पर जांच न कराने की वजह से आयरन की कमी आम हो जाती है। यदि इसे शुरुआती स्तर पर पहचान लिया जाए, तो सही खान-पान और उपचार से हीमोग्लोबिन को आसानी से सामान्य किया जा सकता है।”
2. विटामिन B12 और फोलिक एसिड की कमी
विटामिन बी12 और फोलिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन विटामिनों की कमी से शरीर स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन नहीं कर पाता है। इसका सीधा असर हीमोग्लोबिन के स्तर पर पड़ता है।
3. शरीर से अधिक खून का निकलना
जब शरीर से लगातार या अधिक मात्रा में खून निकलता है, तो हीमोग्लोबिन तेजी से कम होने लगता है।
दुर्घटना या चोट लगने पर
बहुत अधिक मासिक धर्म
पेट या आंतों से खून आना (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग)
4. पुरानी बीमारियाँ
कुछ लंबे समय तक चलने वाली बीमारियाँ भी हीमोग्लोबिन को प्रभावित कर सकती हैं।
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किडनी की बीमारी
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लीवर से जुड़ी समस्याएँ
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अन्य क्रॉनिक डिजीज़
5. आनुवंशिक (जन्मजात) कारण
कुछ लोगों में यह समस्या जन्म से ही होती है।
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थैलेसीमिया
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सिकल सेल एनीमिया
इन स्थितियों में शरीर सामान्य मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता।
6. अन्य कारण
कुछ जीवनशैली से जुड़ी आदतें भी हीमोग्लोबिन को कम कर सकती हैं, जैसे:
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अधिक शराब का सेवन
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पोषण की कमी वाला आहार
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लगातार तनाव
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लंबे समय तक चलने वाला संक्रमण
और अधिक पढ़े: गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया के कारण, लक्षण और इलाज
हीमोग्लोबिन कम होने के लक्षण (Low Hemoglobin Symptoms)
हीमोग्लोबिन कम होने पर शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे कई लक्षण दिखाई देते हैं।
सामान्य लक्षण:
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लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
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साँस लेने में कठिनाई या जल्दी थकना
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सिरदर्द और चक्कर आना
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त्वचा और होंठों का पीला या फीका पड़ जाना
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दिल की धड़कन तेज होना
गंभीर लक्षण:
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हाथ और पैरों का ठंडा होना
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बार-बार चक्कर आना या बेहोशी
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अत्यधिक पैलापन (Paleness)
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छाती में दर्द
अगर आपको ये लक्षण लंबे समय तक दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
हीमोग्लोबिन की जांच कैसे होती है? Hemoglobin Test in Hindi
हीमोग्लोबिन की जांच करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर साधारण रक्त परीक्षण (Blood Test) की सलाह देते हैं। यह जांच यह पता लगाने में मदद करती है कि खून में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य है या कम। समय पर जांच कराने से एनीमिया जैसी समस्याओं का सही कारण और गंभीरता पता चलती है।
1. CBC टेस्ट (Complete Blood Count)
CBC टेस्ट सबसे आम और जरूरी जांच होती है। इस टेस्ट के जरिए खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा मापी जाती है। इसके साथ ही लाल रक्त कोशिकाओं (RBC), सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) और प्लेटलेट्स की संख्या भी जाँची जाती है। यह टेस्ट डॉक्टर को यह समझने में मदद करता है कि हीमोग्लोबिन की कमी किस स्तर तक है और शरीर पर इसका कितना असर पड़ रहा है।
2. आयरन स्टडीज (Iron Studies)
अगर CBC रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन कम आता है, तो डॉक्टर आयरन स्टडीज कराने की सलाह देते हैं। इससे शरीर में आयरन की मात्रा, आयरन स्टोरेज और आयरन एब्जॉर्प्शन की स्थिति का पता चलता है। यह जांच यह समझने में मदद करती है कि हीमोग्लोबिन की कमी आयरन की कमी के कारण है या किसी अन्य वजह से।
3. विटामिन B12 और फोलिक एसिड टेस्ट
विटामिन B12 और फोलिक एसिड लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। कई बार हीमोग्लोबिन कम होने की वजह आयरन नहीं, बल्कि विटामिन की कमी होती है। इनकी कमी से शरीर स्वस्थ RBC नहीं बना पाता, जिससे हीमोग्लोबिन धीरे-धीरे कम हो जाता है। यह टेस्ट खासतौर पर उन लोगों के लिए जरूरी होता है, जिन्हें लगातार कमजोरी, थकान या चक्कर की शिकायत रहती है।
4. अन्य जांच
कुछ मामलों में डॉक्टर अतिरिक्त जांच भी सुझा सकते हैं, जैसे:
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स्टूल टेस्ट (पेट से खून की जांच के लिए)
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किडनी या लीवर फंक्शन टेस्ट
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थैलेसीमिया या अन्य आनुवंशिक रोगों की जांच
ये भी पढ़े: खून की कमी: जानें इसके कारण, लक्षण और प्रभावी इलाज
हीमोग्लोबिन कम होने पर उपचार Low Hemoglobin Treatment
हीमोग्लोबिन कम होने का उपचार उसकी असल वजह पर निर्भर करता है। सही जांच के बाद डॉक्टर कारण पहचानते हैं और उसी के अनुसार इलाज शुरू किया जाता है। अच्छी बात यह है कि सही खान-पान, दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से हीमोग्लोबिन को सामान्य स्तर तक बढ़ाया जा सकता है।
1. आहार में सुधार (Dietary Changes)
हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए संतुलित और पोषक आहार सबसे जरूरी है। रोज़मर्रा की डाइट में आयरन, विटामिन B12 और फोलिक एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए।
आयरन युक्त खाद्य पदार्थ:
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हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे पालक, मेथी, सरसों
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दालें, चना, राजमा, सोयाबीन
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नॉन-वेज खाने वालों के लिए लाल मांस, मुर्गी और मछली
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अंडा और दूध
विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ:
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विटामिन C शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाता है।
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संतरा, नींबू, मौसमी
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आम, अमरूद, स्ट्रॉबेरी
फोलिक एसिड और विटामिन B12 युक्त खाद्य पदार्थ:
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अंडा, दूध, दही, पनीर
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हरी पत्तेदार सब्जियाँ
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अंजीर और अन्य सूखे फल
आयरन युक्त भोजन के साथ चाय या कॉफी लेने से बचें, क्योंकि इससे आयरन का अवशोषण कम हो सकता है।
2. दवाओं का सेवन
अगर केवल आहार से हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ रहा है, तो डॉक्टर दवाओं की सलाह देते हैं।
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आयरन की गोलियाँ या सिरप
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विटामिन B12 और फोलिक एसिड सप्लीमेंट
इन दवाओं का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।
दवा लेते समय:
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पर्याप्त पानी पिएँ
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संतुलित आहार लें
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दवा का कोर्स बीच में न छोड़ें
3. गंभीर मामलों में उपचार
कुछ स्थितियों में हीमोग्लोबिन बहुत अधिक कम हो जाता है, जिससे शरीर को तुरंत ऑक्सीजन की जरूरत होती है।
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ऐसे मामलों में डॉक्टर ब्लड ट्रांसफ्यूजन (Blood Transfusion) की सलाह दे सकते हैं।
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यदि हीमोग्लोबिन की कमी किसी पुरानी बीमारी जैसे किडनी, लीवर या थैलेसीमिया के कारण है, तो सबसे पहले उस बीमारी का इलाज जरूरी होता है।
समय पर इलाज न होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
4. जीवनशैली में बदलाव
केवल दवा और खान-पान ही नहीं, बल्कि जीवनशैली भी हीमोग्लोबिन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
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रोज़ाना पर्याप्त नींद लें और शरीर को पूरा आराम दें।
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हल्का और नियमित व्यायाम करें, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
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तनाव कम करने के लिए योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करें।
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शराब और धूम्रपान से दूरी बनाए रखें।
हीमोग्लोबिन बढ़ाने के घरेलू उपाय Home Remedies to Increase Hemoglobin
घरेलू उपाय हल्के मामलों में काफी मददगार साबित हो सकते हैं और शरीर को प्राकृतिक तरीके से मजबूत बनाते हैं।
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सूप और दलिया: मसूर दाल का सूप, पालक या हरी सब्जियों का सूप रोज़ पीने से हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद मिलती है।
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सीजनल फल: पपीता, आम, अनार और संतरा आयरन व विटामिन C से भरपूर होते हैं।
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सूखे मेवे: काजू, बादाम और किशमिश को भिगोकर खाने से शरीर को आयरन मिलता है।
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जूस और स्मूदी: पालक, चुकंदर और गाजर का जूस या स्मूदी नियमित रूप से लेने से खून की कमी दूर करने में मदद मिलती है।
हीमोग्लोबिन कम होने से बचाव Low Hemoglobin Prevention
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संतुलित आहार लें, जिसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 पर्याप्त मात्रा में हो।
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खासकर महिलाओं और बच्चों में नियमित रूप से हीमोग्लोबिन और CBC टेस्ट कराएं।
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भारी मासिक धर्म, चोट या खून की बीमारी के समय डॉक्टर से परामर्श लें।
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शराब और धूम्रपान से बचें।
निष्कर्ष:
हीमोग्लोबिन हमारे शरीर के लिए जीवनदायिनी है। इसकी कमी से थकान, कमजोरी और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। सही आहार, जीवनशैली और समय पर चिकित्सकीय सलाह से हीमोग्लोबिन की कमी को आसानी से सुधारा जा सकता है। अगर आपको लगातार थकान, चक्कर, पीला पड़ना या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो तुरंत अपना हीमोग्लोबिन टेस्ट करवाएं और अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए उचित उपचार हेतु गुड़गांव स्थित मिरेकल्स हेल्थकेयर में अपने नजदीकी आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ (internal medicine doctor near you) से परामर्श लें।
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Frequently Asked Questions
हीमोग्लोबिन कम होने पर थकान, कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना और त्वचा का पीला पड़ना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
हीमोग्लोबिन की कमी से मुख्य रूप से एनीमिया (Anemia) नामक रोग होता है।
आयरन, विटामिन B12 और फोलिक एसिड से भरपूर भोजन जैसे पालक, दालें, अनार, अंडा, दूध और हरी सब्जियाँ खानी चाहिए।
हीमोग्लोबिन का निर्माण बोन मैरो (अस्थि मज्जा) में लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर होता है।

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