प्रेग्नेंसी के दौरान सीने में जलन: कारण, घरेलू उपाय और बचाव के तरीके

Summary

प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न (Heartburn in Pregnancy) एक आम समस्या है, खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही में। गर्भावस्था के दौरान hormonal changes और बढ़ते गर्भाशय का पेट पर दबाव heartburn के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में सीने में जलन, खट्टी डकार, गले में जलन और मुंह में खट्टा स्वाद शामिल हैं। एक बार में ज्यादा खाने के बजाय छोटे-छोटे meals लेना heartburn को कम करने में मदद कर सकता है। खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से बचना और सोने से पहले पर्याप्त अंतर रखना फायदेमंद हो सकते हैं। मसालेदार, तला-भुना, बहुत oily या व्यक्तिगत रूप से trigger करने वाले foods को सीमित करने से symptoms कम हो सकते हैं। रात में heartburn होने पर upper body को थोड़ा ऊंचा रखकर सोना राहत देने में मदद कर सकता है। पर्याप्त पानी पीना और आरामदायक, ढीले कपड़े पहनना भी pregnancy में digestive discomfort कम करने में सहायक हो सकते हैं। Pregnancy में कोई भी antacid या medication डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि हर दवा गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं होती। अगर heartburn बार-बार हो रहा है या आपकी नींद और daily routine को प्रभावित कर रहा है, तो gynecologist से consultation लेना जरूरी है। तेज या असामान्य chest pain, सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी या खून आने जैसे लक्षणों को केवल acidity समझकर ignore नहीं करना चाहिए। सही lifestyle changes और समय पर medical advice के साथ pregnancy heartburn को काफी हद तक manage किया जा सकता है। मिरेकल्स हेल्थकेयर, गुड़गांव में 50 से अधिक महिला गायनेकोलॉजिस्ट और ऑब्स्टेट्रिशियन की विशेषज्ञ टीम गर्भावस्था, मातृत्व देखभाल और महिलाओं से जुड़ी विभिन्न स्वास्थ्य देखभाल के लिए व्यक्तिगत और व्यापक देखभाल प्रदान करती है।

क्या प्रेग्नेंसी के दौरान खाना खाने के बाद सीने में जलन (Heartburn in Pregnancy), खट्टी डकार या गले तक खट्टापन महसूस होता है? गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल और शारीरिक बदलावों के कारण ऐसी समस्याएं आम हो सकती हैं। जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है, खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही में, कई महिलाओं को सीने में जलन, खट्टी डकार, गले में जलन या खाना खाने के बाद भारीपन जैसी समस्याएं अधिक परेशान कर सकती हैं।

हालांकि प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न आमतौर पर गंभीर समस्या नहीं होती, लेकिन बार-बार होने वाली जलन नींद, खान-पान और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। कुछ आसान Lifestyle और Dietary Changes के साथ सुरक्षित घरेलू उपाय गर्भावस्था के दौरान सीने में जलन के लक्षणों (Heartburn in Pregnancy Symptoms) को कम करने में मदद कर सकते हैं।

प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न क्या है? What is Heartburn During Pregnancy?

हार्टबर्न को आम भाषा में सीने में जलन कहा जाता है। इसमें पेट का एसिड ऊपर की ओर भोजन नली (Esophagus) में आने लगता है, जिससे सीने के बीच या गले के पास जलन महसूस हो सकती है। नाम में “Heart” होने के बावजूद हार्टबर्न का संबंध आमतौर पर दिल से नहीं, बल्कि पाचन तंत्र और पेट के एसिड से होता है।

मिरेकल्स हेल्थकेयर गुरुग्राम की स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynae in Gurgaon) डॉ. साधना शर्मा, बताती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल और शारीरिक बदलावों के कारण पेट का एसिड ऊपर आने की संभावना बढ़ सकती है, जिससे हार्टबर्न या सीने में जलन महसूस होती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान हार्टबर्न के साथ कुछ महिलाओं को ये लक्षण भी हो सकते हैं

  • सीने या गले में जलन

  • खट्टी या कड़वी डकार

  • मुंह में एसिड या खट्टा स्वाद आना

  • खाना खाने के बाद पेट में भारीपन

  • लेटने पर जलन बढ़ना

  • बार-बार डकार आना

  • गले में जलन या खुजली महसूस होना

  • खाना या एसिड ऊपर आने जैसा महसूस होना

  • लगातार उल्टी  होना

प्रेग्नेंसी में बार-बार उल्टी होने से हैं परेशान? आखिर इससे राहत पाने के लिए क्या किया जा सकता है? जानने के लिए पढ़ें: Expert Relief Tips to Avoid Vomiting in Pregnancy

प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न क्यों होता है? Why Heartburn in Pregnancy?

प्रेग्नेंसी में सीने में जलन के कारण (Heartburn in Pregnancy Causes) केवल खान-पान से जुड़े नहीं होते। गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल और शारीरिक बदलाव भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं।

1. प्रेग्नेंसी हार्मोन में बदलाव

प्रेग्नेंसी के दौरान प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। यह हार्मोन शरीर की मांसपेशियों को आराम देता है, जिसमें 'लोअर इसोफेजियल स्फिंक्टर' (Lower esophageal sphincter) भी शामिल है।

जब यह मांसपेशी बहुत ज़्यादा ढीली हो जाती है, तो पेट का एसिड आसानी से वापस इसोफेगस में आ सकता है। इसे प्रेग्नेंसी के दौरान एसिडिटी (acidity in pregnancy) का मुख्य कारण माना जाता है, जिससे सीने में जलन, खट्टी डकारें और गले में जलन जैसे लक्षण होते हैं।

2. बढ़ता हुआ गर्भाशय

जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है। इससे पेट पर दबाव पड़ सकता है। पेट पर पड़ने वाले इस दबाव के कारण खासकर खाना खाने के बाद या लेटने पर एसिड ऊपर की ओर आ सकता है।

डॉ. साधना के अनुसार गर्भावस्था के आगे बढ़ने के साथ पेट पर बढ़ता दबाव हार्टबर्न और एसिडिटी की समस्या को और बढ़ा सकता है।

इसी वजह से, गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान कई महिलाओं को सीने में जलन (Heartburn in Pregnancy Third Trimester) की ज़्यादा तकलीफ़ होती है।

3. खाना खाने की आदतें

बहुत ज्यादा खाना, जल्दी-जल्दी खाना या लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद एक साथ ज्यादा खाना भी हार्टबर्न को बढ़ा सकता है।

4. कुछ खाद्य पदार्थ

कुछ महिलाओं में कुछ खास तरह के खाने-पीने की चीज़ों से सीने में जलन (हार्टबर्न) हो सकती है। जैसे:

  • बहुत ज़्यादा मसालेदार खाना

  • डीप-फ्राइड खाना

  • तेल वाला खाना

  • खट्टे फल (सिट्रस फ्रूट्स)

  • टमाटर वाली चीज़ें

  • चॉकलेट

  • कैफ़ीन वाली ड्रिंक्स

  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्स

हर महिला के लिए ये चीज़ें अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए, यह ध्यान रखना फ़ायदेमंद है कि कौन-सी चीज़ें आपके लिए जलन को और बढ़ा देती हैं।

5. खाना खाने के तुरंत बाद लेटना

खाने के तुरंत बाद लेटने से पेट का एसिड ऊपर आने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना मददगार हो सकता है।

प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न के घरेलू उपाय Home Remedies For Heartburn in Pregnancy

अगर हार्टबर्न हल्का और कभी-कभी होता है, तो कुछ lifestyle changes और घरेलू उपाय राहत देने में मदद कर सकते हैं।

1. थोड़ा-थोड़ा करके खाना खाएं

डॉ. साधना शर्मा बताती हैं, “हमारी ओपीडी में कई गर्भवती महिलाएं आती हैं, जिन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान एसिडिटी की समस्या होती है। उनका सबसे पहला सवाल अक्सर यही होता है कि इस से जल्दी छुटकारा कैसे पाएं (how to get rid of heartburn during pregnancy fast)

ऐसे में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किन खाद्य पदार्थों या आदतों की वजह से एसिडिटी बढ़ रही है। खान-पान और रोजमर्रा की दिनचर्या में कुछ छोटे बदलाव करके हार्टबर्न की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।”

एक बार में बहुत सारा खाना खाने के बजाय, दिन भर में थोड़ा-थोड़ा और संतुलित खाना खाएं। इससे पेट पर अचानक और ज़्यादा दबाव नहीं पड़ता और पाचन (Digestion) में भी मदद मिलती है।

2. खाना धीरे-धीरे खाएं

भोजन को अच्छी तरह चबाकर और धीरे-धीरे खाने की कोशिश करें। जल्दी-जल्दी खाने से पेट में असहजता और bloating बढ़ सकती है, जो कुछ महिलाओं में heartburn को भी बढ़ा सकती है।

3. खाना खाने के बाद तुरंत न लेटें

भोजन के बाद कम से कम कुछ समय तक सीधा बैठना या हल्की activity करना बेहतर हो सकता है। खाने के तुरंत बाद सोने या लेटने से बचें। 

4. सोते समय सिर और ऊपरी शरीर को थोड़ा ऊंचा रखें

डॉ. कुंडू सुझाव देती हैं कि अगर प्रेग्नेंसी के दौरान सीने में जलन रात के समय (Heartburn in Pregnancy at Night) ज्यादा बढ़ जाती है, तो सोते समय सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से को थोड़ा ऊंचा रखें। इससे पेट का एसिड भोजन नली में वापस आने की संभावना कम हो सकती है। इसके लिए गर्दन के नीचे कई तकिए लगाने के बजाय पूरे ऊपरी शरीर को सही सहारा देना अधिक आरामदायक और प्रभावी हो सकता है।

5. हार्टबर्न बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ पहचानें

पता लगाएं कि प्रेग्नेंसी में किन चीज़ों से सीने में जलन (What Foods Cause Heartburn in Pregnancy) होती है। अगर कोई खास खाना खाने के बाद आपको बार-बार सीने में जलन महसूस होती है, तो कुछ समय के लिए उसे कम करके देखें।

खाने-पीने की एक साधारण डायरी रखना भी मददगार हो सकता है। इसमें आप दिनभर में क्या खाती हैं और उसके बाद हार्टबर्न या जलन कितनी होती है, यह नोट कर सकती हैं। इससे उन खाद्य पदार्थों या खाने की आदतों को पहचानने में आसानी होती है, जो आपकी परेशानी को बढ़ा सकते हैं।

हालांकि, प्रेग्नेंसी के दौरान बिना डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के अपनी डाइट से कई खाद्य पदार्थों को पूरी तरह हटा देना सही नहीं है। गर्भावस्था में मां और बच्चे, दोनों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना जरूरी है। इसलिए अगर हार्टबर्न बार-बार हो रहा है या आप अपनी डाइट को लेकर असमंजस में हैं, तो अपने नजदीकी डायटीशियन (Dietician Near You) से परामर्श करें और अपनी जरूरत के अनुसार संतुलित प्रेग्नेंसी डाइट प्लान (Pregnancy Diet Plan) तैयार करवाएं।

प्रेग्नेंसी में हर महीने बदलती जरूरतों के साथ क्या आपकी डाइट भी बदलनी चाहिए? Trimester के हिसाब से कौन-से foods आपकी pregnancy diet का हिस्सा होने चाहिए और किन पोषक तत्वों पर खास ध्यान देना जरूरी है जानने के लिए पढ़ें: Trimester Wise Indian Pregnancy Diet Plan for Women 

6. पर्याप्त पानी पिएं

दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। लेकिन कुछ महिलाओं को भोजन के दौरान बहुत अधिक मात्रा में पानी पीने से पेट ज्यादा भरा हुआ महसूस हो सकता है। इसलिए पानी को पूरे दिन में थोड़ा-थोड़ा करके लेना बेहतर हो सकता है।

7. बहुत तंग कपड़े पहनने से बचें

प्रेग्नेंसी में पेट पर ज्यादा दबाव डालने वाले tight कपड़े असहजता बढ़ा सकते हैं। आरामदायक और ढीले कपड़े पहनना बेहतर विकल्प हो सकता है।

8. रात का खाना समय पर खाएं

सोने से ठीक पहले भारी खाना खाने से बचें। रात के खाने और सोने के समय के बीच उचित अंतर रखने की कोशिश करें। इससे रात में एसिड रिफ्लक्स और सीने में जलन (Acidity and Heartburn in Pregnancy) जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

क्या प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न के लिए दवा ले सकते हैं? Can I Take Medicine for Heartburn in Pregnancy?

“क्या प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न के लिए कोई दवा ले सकते हैं?” यह एक ऐसा सवाल है जो expecting moms अक्सर पूछती हैं, खासकर जब सीने में जलन बार-बार होने लगे और घरेलू उपायों से राहत न मिले।

डॉ. शर्मा बताती हैं, “अगर प्रेग्नेंसी के दौरान हार्टबर्न कभी-कभार हो रहा है, तो खान-पान और lifestyle में कुछ बदलाव करके इसे manage किया जा सकता है। लेकिन अगर जलन बार-बार हो रही है, बहुत ज्यादा है या इसकी वजह से रात में नींद प्रभावित हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।”

वह आगे कहती हैं, “प्रेग्नेंसी में हर दवा सुरक्षित नहीं होती। इसलिए अपनी मर्जी से antacid या acid-reducing medicine लेना सही नहीं है। आपकी pregnancy की stage, symptoms और medical history को देखकर ही यह तय किया जाता है कि दवा की जरूरत है या नहीं और आपके लिए कौन-सा treatment उपयुक्त रहेगा।”

सिर्फ़ इसलिए किसी प्रोडक्ट को प्रेग्नेंसी के दौरान सुरक्षित न मानें कि उस पर ‘नेचुरल’ या ‘सेफ़’ लिखा है। हर्बल प्रोडक्ट्स, सप्लीमेंट्स या किसी भी घरेलू नुस्खे का नियमित इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान आपको लगातार सीने में जलन महसूस होती है या lifestyle में बदलाव के बावजूद राहत नहीं मिलती, तो खुद से इलाज करने के बजाय अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लें और अपनी स्थिति के अनुसार सही उपचार की जानकारी प्राप्त करें।

प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न कब चिंता का कारण हो सकता है?

प्रेग्नेंसी के दौरान सीने में जलन (हार्टबर्न) के ज़्यादातर मामले सामान्य होते हैं, खासकर सीने में नया, तेज या असामान्य दर्द होने पर इसको सिर्फ़ एसिडिटी का कारण मानना ​​सही नहीं है।

अगर ऐसा हो तो अपने नज़दीकी गायनेकोलॉजिस्ट (Gynaecology Doctor Near You) से सलाह लें:

  • सीने में तेज या दबाव जैसा दर्द हो

  • सांस लेने में परेशानी हो

  • दर्द हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक जाए

  • बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो

  • लगातार उल्टी हो

  • निगलने में कठिनाई हो

  • उल्टी में खून दिखाई दे

  • मल का रंग काला या tar जैसा हो

  • लक्षण बहुत ज्यादा या लगातार बढ़ रहे हों

प्रेग्नेंसी में सीने की जलन से कैसे बचें? How To Prevent Heartburn in Pregnancy?

कुछ छोटे बदलाव रोजाना की routine में शामिल करके प्रेग्नेंसी में सीने की जलन (Heartburn During Pregnancy) को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए आप इन बातों का ध्यान रखें:

  • दिन में एक साथ ज्यादा खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा और बार-बार खाएं।

  • बहुत मसालेदार, तला-भुना और ज्यादा oily खाना कम करें।

  • खाना जल्दबाजी में न खाएं और अच्छी तरह चबाकर धीरे-धीरे खाएं।

  • खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें और कुछ समय तक सीधे बैठें या हल्की activity करें।

  • रात में सोने से ठीक पहले भारी भोजन न करें।

  • जिन foods या drinks के बाद आपको जलन बढ़ती है, उन्हें पहचानें और उनकी मात्रा कम करें।

  • पेट और कमर पर ज्यादा दबाव डालने वाले कपड़ों के बजाय ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें।

  • पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, लेकिन भोजन के साथ बहुत अधिक पानी पीने से बचें।

  • बिना डॉक्टर की सलाह के antacid या कोई अन्य दवा न लें।

  • अगर सीने में जलन बार-बार होती है, बहुत ज्यादा है या इन बदलावों के बावजूद राहत नहीं मिलती, तो अपने gyne doctor से सलाह लें

प्रेग्नेंसी में सीने की जलन को नजरअंदाज न करें

गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों के साथ हार्टबर्न भी हो सकता है। सही खान-पान, खाने की आदतों में बदलाव और रोजमर्रा की कुछ सावधानियां इसे नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। वहीं, अगर समस्या ज्यादा परेशान कर रही है या आपके आराम और नींद पर असर डाल रही है, तो इसके पीछे के कारण को समझना जरूरी है।

क्या आप प्रेग्नेंसी के दौरान एसिडिटी या सीने में जलन से परेशान हैं? गुड़गांव में अपने आस-पास मिरेकल्स हेल्थकेयर में अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट (Gynaecologist Near You) से सलाह लें और अपनी प्रेग्नेंसी के लिए सही सलाह पाएं। Call Now: 1244797600 | WhatsApp: 9820965000

प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न से राहत के लिए विशेषज्ञ देखभाल, मिरेकल्स हेल्थकेयर के साथ

गर्भावस्था में हार्टबर्न और एसिडिटी जैसी समस्याएं कई महिलाओं को परेशान कर सकती हैं। सही खान-पान, रोजमर्रा की आदतों और समय पर विशेषज्ञ की सलाह से इन लक्षणों को समझने और मैनेज करने में मदद मिल सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली हर परेशानी के लिए आपकी pregnancy stage और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

  • मिरेकल्स हेल्थकेयर, जो 2002 से गुरुग्राम में मैटरनिटी सेवाएँ दे रहा है, वहाँ हर महिला की ज़रूरतों के हिसाब से प्रेग्नेंसी केयर (Pregnancy Care in Gurgaon) दी जाती है। 50 से ज़्यादा अनुभवी गायनेकोलॉजिस्ट और ऑब्सटेट्रिशियन की टीम प्रेग्नेंसी के चरण, मेडिकल हिस्ट्री, वज़न, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और सेहत से जुड़े दूसरे पैरामीटर्स को ध्यान में रखकर प्रेग्नेंसी केयर से जुड़े फ़ैसलों में मदद करती है।

  • 25,000+ सफल डिलीवरी के अनुभव के साथ मिरेकल्स हेल्थकेयर में pregnancy care को गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों के साथ जोड़ा जाता है। नियमित antenatal monitoring से माँ और शिशु के स्वास्थ्य पर नजर रखने के साथ pregnancy के दौरान सामने आने वाली सामान्य और विशेष जरूरतों के अनुसार care प्रदान की जाती है।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान अगर हार्टबर्न के साथ एनीमिया, ब्लड शुगर, हाई ब्लड प्रेशर या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की आवश्यकता सामने आती है, तो मिरेकल्स हेल्थकेयर में बहुविशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध है। गायनेकोलॉजिस्ट और ऑब्सटेट्रिशियन के साथ जरूरत के अनुसार अन्य विशेषज्ञों की सलाह और जांच की सुविधा मिलती है, जिससे गर्भावस्था के दौरान अलग-अलग स्वास्थ्य जरूरतों पर एक साथ ध्यान दिया जा सके।

  • प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न को नियंत्रित करने के लिए खान-पान में सही बदलाव भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। मिरेकल्स हेल्थकेयर के आहार विशेषज्ञ गर्भावस्था के चरण, पोषण संबंधी जरूरतों और हार्टबर्न बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों को ध्यान में रखते हुए आहार संबंधी सलाह देते हैं। इससे जरूरी पोषक तत्वों को डाइट में बनाए रखते हुए ऐसे खाद्य पदार्थों और खाने की आदतों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जो सीने में जलन या एसिडिटी को बढ़ा सकते हैं।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान जरूरी जांच और दवाओं के लिए अलग-अलग जगह जाने की परेशानी को कम करने के लिए मिरेकल्स हेल्थकेयर में 24×7 इन-हाउस डायग्नोस्टिक और फार्मेसी सेवाएं उपलब्ध हैं। इससे गर्भावस्था के दौरान आवश्यक जांच, रिपोर्ट और दवाओं से जुड़ी जरूरतों को एक ही स्थान पर आसानी से संभालने में मदद मिलती है।

  • डिलीवरी के बाद भी मां और बच्चे की जरूरतों के अनुसार विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध रहती है। Pediatric care और lactation counselling के माध्यम से नई माताओं को breastfeeding की शुरुआत, feeding techniques और शुरुआती postpartum concerns को लेकर आवश्यक guidance दी जाती है।

  • गुरुग्राम के सेक्टर-14, सेक्टर-56 और सेक्टर-82 में मिरेकल्स हेल्थकेयर की मौजूदगी के कारण pregnancy consultation, antenatal check-ups, diagnostic services और maternity care जैसी सुविधाओं तक पहुंच आसान होती है।

गुरुग्राम में प्रेग्नेंसी केयर के लिए मिरेकल्स हेल्थकेयर के सेंटर

गुरुग्राम में मिरेकल्स हेल्थकेयर के अलग-अलग सेंटर आपकी लोकेशन के अनुसार प्रेग्नेंसी से जुड़ी सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करते हैं।

1. मिरेकल्स अपोलो क्रेडल, सेक्टर 14, गुरुग्राम

मैटरनिटी और गायनेकोलॉजी के लिए समर्पित यह सेंटर गर्भावस्था की निगरानी से लेकर प्रसव और नवजात शिशु की देखभाल तक आवश्यक विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराता है। लेवल-III एनआईसीयू और विभिन्न विशेषज्ञताओं का सहयोग भी यहां उपलब्ध है।

नजदीकी क्षेत्र: ओल्ड गुरुग्राम, सिविल लाइंस, सदर बाजार, राजीव चौक, सेक्टर 15, पटेल नगर, अशोक विहार और झारसा रोड।

2. मिरेकल्स मेडिक्लिनिक, सेक्टर 14, गुरुग्राम

नियमित प्रेग्नेंसी विजिट और विशेषज्ञ परामर्श के लिए यह सेंटर सुविधाजनक विकल्प है। यहां अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी, अन्य जांच और फार्मेसी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे रोजमर्रा की प्रेग्नेंसी से जुड़ी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है।

नजदीकी क्षेत्र: सेक्टर 17, सेक्टर 15 पार्ट I और II, न्यू कॉलोनी, गुरुग्राम रेलवे स्टेशन, शिवाजी नगर और जैकबपुरा।

3. मिरेकल्स मेडिक्लिनिक, सेक्टर 56, गुरुग्राम

गर्भावस्था के दौरान जब किसी विशेष जांच या विशेषज्ञ मूल्यांकन की जरूरत हो, तो यह सेंटर एमआरआई, सीटी स्कैन, पैथोलॉजी और अन्य डायग्नोस्टिक सुविधाओं के साथ सहायता प्रदान करता है।

नजदीकी क्षेत्र: गोल्फ कोर्स रोड, सुशांत लोक 2 और 3, सेक्टर 54, सेक्टर 55, सेक्टर 57, वजीराबाद, निर्वाणा कंट्री और डीएलएफ फेज V।

4. मिरेकल्स अपोलो क्रेडल/स्पेक्ट्रा, सेक्टर 82, गुरुग्राम

न्यू गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए यह सेंटर मैटरनिटी केयर के साथ डायग्नोस्टिक और अन्य विशेषज्ञ सेवाओं की सुविधा देता है। जरूरत के अनुसार गायनेकोलॉजी, डायग्नोस्टिक्स और मल्टी-स्पेशियलिटी सेवाओं का सहयोग लिया जा सकता है।

नजदीकी क्षेत्र: न्यू गुरुग्राम, सेक्टर 83, सेक्टर 84, सेक्टर 85, सेक्टर 86, वाटिका इंडिया नेक्स्ट, द्वारका एक्सप्रेसवे और मानेसर।

प्रेग्नेंसी में हार्टबर्न, एसिडिटी या किसी अन्य समस्या को लेकर विशेषज्ञ सलाह की जरूरत है? अपनी लोकेशन के अनुसार मिरेकल्स हेल्थकेयर के नजदीकी सेंटर पर प्रेग्नेंसी केयर के लिए परामर्श लें।

Written and Verified by:

Dr. Sadhna Sharma Exp: 20

MBBS, MD (Obs. &Gynae.)


Frequently Asked Questions

हल्का, कम मसालेदार और कम तला-भुना भोजन लें, जैसे दलिया, खिचड़ी, केला और सब्जियां। जिन खाद्य पदार्थों से आपको जलन बढ़ती है, उन्हें पहचानकर सीमित करें।

डॉ. साधना गर्भवती महिलाओं को सलाह देती हैं कि वे थोड़ा-थोड़ा करके खाएं, खाना खाने के तुरंत बाद न लेटें और सोने से कुछ घंटे पहले ही खाना खा लें। अगर रात में बेचैनी महसूस हो, तो शरीर के ऊपरी हिस्से को थोड़ा ऊंचा करके सोने से आराम मिल सकता है।

सबसे पहले खान-पान और रोजमर्रा की आदतों में बदलाव किए जा सकते हैं। अगर समस्या ज्यादा हो या इन उपायों से राहत न मिले, तो डॉक्टर की सलाह से प्रेग्नेंसी में सुरक्षित दवा ली जा सकती है।

डॉ. शर्मा का कहना है कि प्रेग्नेंसी के किसी भी चरण में हार्टबर्न हो सकता है, लेकिन दूसरी और तीसरी तिमाही में इसकी संभावना बढ़ जाती है।

गैस का दर्द आमतौर पर पेट में, खासकर ऊपरी पेट या पेट के अलग-अलग हिस्सों में महसूस हो सकता है और कभी-कभी छाती तक भी महसूस हो सकता है। नया या तेज सीने का दर्द केवल गैस मानकर नज़रअंदाज़ न करें।