कब्ज का कारण बन सकती हैं ये बाथरूम आदतें
Summary
क्या हर सुबह बाथरूम जाने में देर होती है? या फिर टॉयलेट पर बैठकर आपके हाथ में फोन रहता है? अगर हां, तो ये छोटी-छोटी बाथरूम आदतें आपके लिए कब्ज (constipation) की बड़ी वजह बन सकती हैं। हम अक्सर लाइफस्टाइल और डाइट पर ध्यान देते हैं, लेकिन बाथरूम की गलत आदतें भी पाचन को काफी खराब कर सकती हैं। आज इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कौन-सी बाथरूम आदतें कब्ज को बढ़ाती हैं और इन्हें कैसे सुधारा जा सकता है। इससे आपको अपनी दिनचर्या सुधारने में मदद मिलेगी।
1. सुबह बाथरूम जाने में देरी करना
कई लोग सुबह उठते ही शौच जाने की इच्छा को अनदेखा कर देते हैं। लेकिन ऐसा करने से पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। आपका शरीर संकेत देता है कि अब आपको शौच जाना चाहिए। इस संकेत को अनदेखा करने से बड़ी आंत में मल सूख जाता है, जिससे कब्ज हो जाता है।
डॉ. अजय कौशिक, वरिष्ठ आंतरिक चिकित्सा चिकित्सक (internal medicine doctor in Gurgaon), मिरेकल हेल्थकेयर गुरुग्राम का कहना है, “सुबह उठते ही बाथरूम जाने की आदत पाचन को मजबूत बनाती है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाती है। शरीर के प्राकृतिक संकेतों को नजरअंदाज करना लंबे समय में गंभीर पाचन समस्याओं को जन्म दे सकता है।”
क्या करें?
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सुबह उठकर 10–15 मिनट में बाथरूम जाएं।
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इस आदत को रोजाना की रूटीन का हिस्सा बनाएं।
2. बाथरूम में मोबाइल फोन लेकर जाना
आजकल ज्यादातर लोग बाथरूम में भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। फोन पर स्क्रॉल करने से अनजाने में ही बाथरूम में जरूरत से ज्यादा समय लग जाता है, जिसका पाचन पर बुरा असर पड़ सकता है।
इससे नुकसान?
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टॉयलेट पर लंबे समय तक बैठने से कोलन पर प्रेशर बढ़ता है।
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मल त्याग में ज्यादा समय लगने से स्टूल हार्ड हो जाता है।
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इससे न सिर्फ कब्ज, बल्कि पाइल्स (बवासीर) का खतरा भी बढ़ता है।
क्या करें?
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मोबाइल को बाथरूम में ले जाना बंद करें।
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सिर्फ 5–7 मिनट में काम न हो तो उठकर बाद में दोबारा कोशिश करें।
3. गलत पोजीशन में बैठना
अधिकतर लोग वेस्टर्न टॉयलेट पर सीधे बैठ जाते हैं, लेकिन यह मल त्याग के प्राकृतिक पोज़िशन को सपोर्ट नहीं करता। इसी वजह से स्टूल आसानी से बाहर नहीं आ पाता और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।
क्यों है यह खराब आदत?
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गलत एंगल में बैठने से स्टूल को बाहर आने में मुश्किल होती है।
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इससे बाउल्स पर दबाव अधिक पड़ता है।
कैसे सुधारें?
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वेस्टर्न टॉयलेट में छोटा स्टूल (Footstool) रखकर पैरों को थोड़ा ऊंचा करें।
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इससे 35° एंगल बनता है और मल त्याग आसान होता है।
4. मल त्याग के दौरान जोर लगाना
कई लोग जल्दी बाथरूम से निकलने की जल्दबाज़ी में ज़ोर लगाते हैं, लेकिन यह आदत पाचन पर गलत असर डाल सकती है।
क्या नुकसान?
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इससे मल और ज्यादा हार्ड हो सकता है।
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पाइल्स, फिशर और ब्लीडिंग की समस्या बढ़ सकती है।
कैसे ठीक करें?
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खुद को रिलैक्स रखें।
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हाई-फाइबर डाइट लें ताकि मल मुलायम रहे।
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सुबह गुनगुना पानी पीने की आदत डालें।
5. बाथरूम में ज्यादा देर बैठना
अक्सर लोग मान लेते हैं कि बाथरूम में ज्यादा देर बैठने से पेट अच्छी तरह साफ हो जाएगा, जबकि सच ये है कि इससे उल्टा परेशानी बढ़ सकती है।
क्यों नुकसानदायक है?
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कोलन पर दबाव बढ़ता है।
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मल त्याग की प्राकृतिक गति प्रभावित होती है।
बेहतर आदतें:
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5–7 मिनट से ज्यादा न बैठें।
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अचानक न उठें, धीरे-धीरे उठें ताकि प्रेशर कम लगे।
6. पर्याप्त पानी न पीना
जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो आंतें स्टूल से नमी खींच लेती हैं, जिससे वह और ज्यादा सख्त व सूखा हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि बाथरूम जाते समय दर्द, जलन और भारीपन महसूस होता है, और मल त्याग करना काफी मुश्किल हो जाता है। पर्याप्त पानी न पीने की यह आदत धीरे-धीरे कब्ज का प्रमुख कारण बन सकती है।
कब्ज का मुख्य कारण:
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कोलन पानी को अवशोषित कर लेता है।
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स्टूल सूख जाता है।
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बाथरूम में दर्द और प्रेशर बढ़ जाता है।
क्या करें?
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दिन में 7–8 ग्लास पानी जरूर पिएं।
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खाली पेट गुनगुना पानी बेहद फायदेमंद है।
7. सुबह की चाय/कॉफी पीते ही बाथरूम जाना
बहुत से लोग सुबह चाय पीकर ही बाथरूम जाते हैं। यह आदत पूरी तरह गलत तो नहीं है, लेकिन रोजाना चाय पर निर्भर होकर बाउल मूवमेंट को ट्रिगर करना पाचन के लिए अच्छा नहीं माना जाता। धीरे-धीरे शरीर प्राकृतिक तरीके से मल त्याग करने के बजाय सिर्फ चाय के सहारे पर निर्भर होने लगता है, जिससे नैचुरल बाउल रिद्म कमजोर पड़ सकती है और इससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।
क्यों?
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चाय/कॉफी पीना एक आदत बन जाती है।
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बिना चाय के शौचालय जाना मुश्किल हो जाता है।
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इससे प्राकृतिक मल त्याग की क्रिया कमजोर हो जाती है।
बेहतर उपाय:
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सुबह सबसे पहले पानी पिएं।
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फाइबर और फल अपनी डायट में शामिल करें।
8. मल त्याग के संकेत को नजरअंदाज करना
कई बार ऑफिस में काम, मीटिंग या बाहर होने की वजह से हम बाथरूम जाने की इच्छा को टाल देते हैं। लेकिन इस आदत से स्टूल दोबारा कोलन में रिटर्न होकर और ज्यादा सख्त हो जाता है, जिससे बाद में मल त्याग करना मुश्किल हो जाता है। बार-बार ऐसा करने से पाचन की प्राकृतिक लय बिगड़ती है और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।
इसके नुकसान:
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स्टूल वापस कोलन में जमा होकर और सूख जाता है।
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कब्ज बढ़ती है।
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आंतों की नियमितता (bowel clock) प्रभावित होती है।
कब्ज से बचने (Constipation Prevention) के लिए अपनाएं ये हेल्दी बाथरूम आदतें
कब्ज को दूर करने में बेहद प्रभावी है और पूरे दिन आपकी पाचन प्रक्रिया को बेहतर रखती है।
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हर सुबह एक तय समय पर बाथरूम जाएं
सुबह का समय मल त्याग के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। जब आप रोज़ एक ही समय पर बाथरूम जाने की आदत बनाते हैं, तो आपकी आंतें भी उसी रूटीन को फॉलो करने लगती हैं। इससे पेट जल्दी और आसानी से साफ होता है और कब्ज की समस्या (constipation) कम होने लगती है।
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बाथरूम में मोबाइल फोन ले जाना बंद करें
आजकल ज्यादातर लोग बाथरूम में मोबाइल लेकर बैठ जाते हैं। फोन स्क्रॉल करते-करते समय का पता ही नहीं चलता और हम जरूरत से ज्यादा देर तक बैठे रहते हैं। इससे आंतों पर दबाव बढ़ता है और स्टूल सख्त हो सकता है। इसलिए बाथरूम में सिर्फ अपना काम करें और मोबाइल को बाहर ही छोड़ दें।
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वेस्टर्न टॉयलेट में फुटस्टूल का इस्तेमाल करें
वेस्टर्न टॉयलेट पर सीधा बैठना शरीर की प्राकृतिक पोज़िशन नहीं है। इससे मल आसानी से बाहर नहीं निकल पाता। अगर आप पैरों के नीचे एक छोटा स्टूल रखकर बैठते हैं, तो शरीर 35° एंगल में आता है, जिससे मल त्याग आसान हो जाता है और कब्ज की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
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मल त्याग के दौरान ज़ोर न लगाएं
कई लोग जल्दी-जल्दी बाथरूम से निकलने के चक्कर में ज़ोर लगाना शुरू कर देते हैं। लेकिन यह आदत पाइल्स, फिशर और ब्लीडिंग जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है। बेहतर है कि आप शांत होकर बैठें और बिना दबाव डाले शरीर को अपना काम करने दें।
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बाथरूम में 5–7 मिनट से ज्यादा न बैठें
अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्यादा देर बैठने से पेट ज्यादा अच्छी तरह साफ हो जाएगा, जबकि यह बिल्कुल गलत है। ज्यादा देर बैठने से आंतों पर दबाव बढ़ता है और कब्ज व पाइल्स का खतरा बढ़ने लगता है। अगर तुरंत काम नहीं होता, तो उठकर कुछ देर बाद दोबारा जाएं।
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रोजाना अपनी डाइट में 25–30 ग्राम फाइबर शामिल करें
फाइबर आपकी आंतों को सक्रिय रखता है और स्टूल को नरम बनाता है। इससे मल आसानी से बाहर आता है। फाइबर पाने के लिए अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, सलाद, सूखे मेवे, बीन्स और साबुत अनाज शामिल करें। नियमित फाइबर कब्ज से बचाव में काफी मदद करता है।
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दिनभर पर्याप्त पानी पिएं
पानी की कमी से शरीर स्टूल की नमी सोख लेता है और स्टूल सख्त हो जाता है, जिससे बाथरूम जाने में दर्द और परेशानी होती है। दिन में कम से कम 7–8 गिलास पानी पिएं। और अगर आप ज्यादा फाइबर लेते हैं, तो पानी और भी जरूरी हो जाता है।
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सुबह गुनगुना पानी पिएं और हल्की वॉक करें
सुबह गुनगुना पानी पीने से आपकी पाचन क्रिया एक्टिव होती है। इसके बाद 10–15 मिनट की हल्की वॉक करने से बाउल मूवमेंट अपने आप ट्रिगर होता है। यह आदत
डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए
अगर आपको इन लक्षणों का अनुभव हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है
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लगातार 3–4 दिनों तक स्टूल न आना
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मल त्याग के दौरान ब्लीडिंग
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बहुत ज्यादा पेट दर्द
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बार-बार पेट सूजन
कब्ज के इलाज (constipation treatment) के लिए विशेषज्ञ आपकी समस्या की जड़ तक पहुँचकर सही डाइट, दवाइयां और जीवनशैली बदलाव की सलाह देंगे, जिससे पाचन सुधारना और कब्ज से राहत पाना आसान हो जाता है।
निष्कर्ष:
छोटी-छोटी बाथरूम आदतें आपके पाचन तंत्र पर गहरा असर डालती हैं। यदि आप लंबे समय से कब्ज की परेशानी महसूस कर रहे हैं, तो अपनी बाथरूम रूटीन को सुधारना पहला और सबसे जरूरी कदम है। सही आदतें अपनाने से न सिर्फ पाचन बेहतर होता है, बल्कि आपका दिन भी हल्का, आरामदायक और ऊर्जा से भरपूर महसूस होता है। बस कुछ छोटे बदलाव आपकी सेहत को लंबे समय तक संतुलित और मजबूत बनाए रख सकते हैं।
अगर कब्ज आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी को लगातार प्रभावित कर रही है, तो इसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ न करें। आज ही अपने नज़दीकी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, मिरेकल्स हेल्थकेयर गुरुग्राम में अनुभवी आंतरिक चिकित्सा चिकित्सक (internal medicine doctor near you) से परामर्श लें। सही समय पर इलाज और स्वस्थ आदतों का संयोजन आपको कब्ज से पूरी तरह राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
Frequently Asked Questions
कब्ज का मुख्य कारण कम फाइबर वाला भोजन, पानी की कमी और बाथरूम की गलत आदतें हैं।
हाँ, कब्ज से पेट पर दबाव बढ़ता है, जिससे पेशाब में जलन या परेशानी हो सकती है।
कब्ज के चार प्रमुख प्रकार हैं अल्पकालिक (Acute), दीर्घकालिक (Chronic), कार्यान्वय (Functional/Idiopathic) और रोकथाम या बाध्यकारी (Obstructive)
बार-बार कब्ज होने का कारण कम पानी पीना, फाइबर की कमी, तनाव या बाथरूम आदतों में गड़बड़ी हो सकता है।
लगातार कब्ज रहना पाचन तंत्र में कमजोरी या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है, इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

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